विजय शर्मा, भोपाल। राजधानी की कोलार तहसील के अंतर्गत दानिश हिल्स की भूमि का विवाद अब एक जमीन-दो रिपोर्ट में उलझ गया है. जिस भूमि पर पोकलेन मशीन चल रही थी, उस दौरान मौके पर राजस्व अमले ने उसे शासकीय जमीन बताया था और उसके बाद पंचनामा भी बनाया गया. इसके बाद हुए निरीक्षण में भी भूमि की मेड़ के दूसरी तरफ की भूमि शासकीय बताई गई. लेकिन बाद में तैयार रिपोर्ट में इसी हिस्से को निजी जमीन बता दिया गया. जमीन की स्थिति बदलने को लेकर रहवासियों ने अब रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के यहां पर शिकायत करते हुए की है.
पोकलेन ने खोला मामला, मौके पर बना पंचनामा
रहवासियों ने बताया कि सीमांकन करने कोलार तहसील के आरआई और पटवारी मौके पर मोबाइल में उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड से जमीन पर पोकलेन चलती मिली. अधिकारियों ने पोकलेन चालक और ठेकेदार की जानकारी लेकर पंचनामा बनाया. पंचनामा और जब्ती दस्तावेजों में पोकलेन को अकबरपुर की शासकीय भूमि, छोटे झाड़ का जंगल, खसरा नंबर-3 में चलते हुए दर्ज किया गया था. पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन मौके पर पुलिस नहीं पहुंची. इसके बाद पोकलेन की जब्ती की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई.
दूसरी बार जांच में जमीन शासकीय
दूसरी बार जांच के लिए नायब तहसीलदार और आरआई ने भी मौके का निरीक्षण किया. रहवासियों का कहना है कि इस बार भी राजस्व रिकॉर्ड दिखाकर मेड़ के दूसरी तरफ की जमीन शासकीय बताई गई. लेकिन बाद में आर आई ने रिपोर्ट में पोकलेन वाले हिस्से को निजी भूमि बता दिया गया. अब सवाल यह है कि एक ही जगह पर हुए निरीक्षणों में जमीन शासकीय बताई गई तो बाद की रिपोर्ट में उसका दर्जा कैसे बदल गया? रहवासियों का दावा है कि संबंधित अधिकारी ने इस रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और पूरे क्षेत्र का दोबारा सीमांकन कराने की बात कही.
पुराने खसरे खोलेंगे जमीन का राज
रहवासियों ने कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और कॉलोनी सेल के प्रभारी एडीएम सुमित कुमार पांडे से पुराने खसरे, नक्शे, पंचनामा, जब्ती दस्तावेज और सभी सीमांकन रिपोर्टों का मिलान कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि रिकॉर्ड में जमीन की सीमा में बदलाव हुआ है तो इसका असर आसपास के पुराने मकानों और निर्माणों पर भी पड़ सकता है.
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने किया था निरीक्षण
रहवासियों ने बताया कि नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की टीम ने मौके की स्थिति देखी थी. उनकी ड्राइंग में पुराने खसरे और सीमांकन रिकॉर्ड के आधार पर मेड़ के दूसरी तरफ की जमीन खसरा नंबर-3 में दर्शाए जाने का दावा किया जा रहा है. यह ड्राइंग नगर निगम में जमा किए जाने की बात भी कही गई है.
पोकलेन गायब, सवाल और गहरे
मौके पर मिली पोकलेन के बाद में गायब होने को लेकर भी रहवासी सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि मशीन को लेकर पुलिस में शिकायत की गई है, लेकिन अभी तक उसकी बरामदगी नहीं हुई. रहवासियों के मुताबिक जमीन का विवाद वर्ष 2023 में एनजीटी में पहुंचा था. उस समय सीमांकन कराने और अतिक्रमण रोकने की बात कही थी. उस समय के दस्तावेजों को भी मौजूदा जांच में शामिल किया जाना चाहिए.
कलेक्टर से शिकायत, एडीएम को जिम्मेदारी
रहवासियों ने कलेक्टर को पूरे मामले के दस्तावेज और दशहरा मैदान से संबंधित ड्राइंग सौंपी है. उनके अनुसार कलेक्टर ने मामले की जिम्मेदारी एडीएम सुमित पांडे को दी है.अब रहवासियों की मांग है कि पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड को आमने-सामने रखकर दोबारा सीमांकन कराया जाए, जिससे जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और दोनों रिपोर्टों में इतना बड़ा अंतर क्यों आया.
इनका कहना है
हमारे पास दानिश हिल्स पहाड़ी को काटकर बिल्डर द्वारा अवैध निर्माण से संबंधी सीमांकन को लेकर शिकायत आ है, उसके आधार पर जांच कर आगे को कार्यवाही की जाएगी,
सुमित कुमार पांडे, एडीएम, प्रभारी कालोनी सेल
