इंदौर:कभी विदेश से आयात होकर भारतीय बाजारों में पहुंचने वाला ड्रैगन फ्रूट अब मालवा की मिट्टी में अपनी जगह बना चुका है. इंदौर के आसपास के खेतों में भी इसकी खेती नजर आने लगी है. गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ के बाद मध्य प्रदेश के रतलाम, मानपुर, सनावद और बदनावर क्षेत्र में किसान इसके पौधे लगा रहे हैं. अनुकूल मौसम के कारण अब यह विदेशी फल स्थानीय किसानों के लिए भी एक विकल्प बनता जा रहा है.
वियतनाम से पहचान रखने वाला ड्रैगन फ्रूट अब वियतनाम, थाईलैंड, चीन और भारत सहित कई उष्णकटिबंधीय देशों में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है. भारत में इसे ‘कमलम’ के नाम से भी जाना जाता है. इसकी खेती की शुरुआत देश में केरल से हुई और इसके बाद धीरे-धीरे गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में इसका विस्तार हुआ. जो फल कभी विदेश से बाजार तक पहुंचता था, उसके पौधे अब मालवा की जमीन पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं। खेती से लेकर बाजार और सेहत तक, ड्रैगन फ्रूट की यह यात्रा अब विदेशी फल से स्थानीय पसंद बनने की ओर बढ़ रही है।
चार रंगों में फल, स्वाद भी अलग-अलग
इंदौर के फल व्यापारी मुनव्वर खान बताते हैं कि बाजार में ड्रैगन फ्रूट की अलग-अलग किस्में उपलब्ध हैं. यह मुख्य रूप से सफेद, पीले और लाल रंग में मिलता है, जबकि कुछ अन्य रंगों की किस्में भी देखने को मिलती हैं. गोल्डन रंग की किस्म बाजार में अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है. अलग-अलग रंग और किस्म के अनुसार इसके स्वाद में भी अंतर होता है. सफेद किस्म का स्वाद हल्का, लाल अपेक्षाकृत अधिक मीठा और पीली किस्म खट्टे-मीठे स्वाद वाली होती है. मुनव्वर खान के मुताबिक बाजार में इसकी कीमत गुणवत्ता और उपलब्धता के आधार पर बदलती है. फिलहाल इसका थोक भाव करीब 50 से 80 रुपए किलो, जबकि खुदरा बाजार में यह 150 से 200 रुपए किलो तक बिक रहा है.
रात में खिलते हैं फूल
ड्रैगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का पौधा है और इसकी खेती की एक खास विशेषता इसके फूल हैं. इसके फूल सामान्यतः रात में खिलते हैं. सूर्यास्त के बाद फूल खुलते हैं और सूर्योदय से पहले मुरझाने लगते हैं. इसी दौरान परागण और फल बनने की प्रक्रिया होती है.
यू ट्यूब पर देखकर शुरू की खेती
किसान प्रतीक ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की बहुत सारी वैरायटी आती है येलो और रेट खाने में बहुत स्वादिष्ट होते हैं और यह फल अच्छी बढ़त के साथ में होता है इसका एक फल 700 से 800 ग्राम तक का भी होता है और यह आप भारत में मौसम के अनुकूल होने पर अच्छी पैदावार देता है. प्रतीक ने बताया कि यह खेती उन्होंने यूट्यूब में देखकर शुरू की थी जो फायदे का सौदा हो रही है.
डाइटिशियन बोलीं-फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर
डाइटिशियन डॉ. प्रीति शुक्ला के अनुसार ड्रैगन फ्रूट में विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर रखने और कब्ज की समस्या कम करने में मदद कर सकता है. इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक होते हैं.उन्होंने बताया कि इसमें मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर रखने में मदद करते हैं. फाइबर के कारण पेट लंबे समय तक भरा महसूस हो सकता है, इसलिए संतुलित आहार का हिस्सा होने पर यह वजन प्रबंधन में भी उपयोगी हो सकता है. इसके अलावा ड्रैगन फ्रूट के बीजों में पाए जाने वाले कुछ स्वस्थ वसा भी आहार की गुणवत्ता में योगदान करते हैं.
ज्यादा खाने से हो सकती है परेशानी
डॉ. शुक्ला के अनुसार किसी भी फल का सेवन संतुलित मात्रा में किया जाना चाहिए. ड्रैगन फ्रूट का अत्यधिक सेवन कुछ लोगों में पाचन संबंधी परेशानी या दस्त का कारण बन सकता है. आम तौर पर एक बार में करीब 100 से 200 ग्राम फल लेना पर्याप्त हो सकता है, हालांकि जरूरत व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और आहार पर निर्भर करती है. उन्होंने कहा कि किसी भी फल को ‘सुपरफूड’ मानकर जरूरत से ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए. किडनी के मरीजों को ड्रैगन फ्रूट सहित पोटैशियम वाले फलों का सेवन डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार करना चाहिए.
