करोड़ों की लागत का कला संकुल बना सफेद हाथी

इंदौर: शहर में कला और संस्कृति को नया मंच देने के उद्देश्य से स्मार्ट सिटी के तहत 55 करोड़ रुपये की लागत से महात्मा गांधी मार्ग पर तैयार किया जा रहा कला संकुल 2025 में तैयार होना था लेकिन अब अपने निर्माण से ज्यादा अपनी बदहाली को लेकर चर्चा में है। स्मार्ट सिटी सिटी के तहत बनने वाला यह प्रोजेक्ट बड़े जोर शोर से शुरू किया गया था लेकिन फंड के अभाव में अब तक अधूरा है ।

जिस परिसर में कलाकारों की प्रस्तुतियां, सांस्कृतिक आयोजन और शहर की रचनात्मक गतिविधियां नजर आनी थीं, वहां इन दिनों शराब खोरी ,खाली बोतल और गंदगी ने पैर पसार रखे हैं । हालात ऐसे हैं कि निर्माण पूरा होने से पहले ही भवन और परिसर के कई हिस्से खराब होने लगे हैं।

परिसर में प्रवेश करते ही जगह-जगह बिखरी शराब की खाली बोतलें, चखने के पाउच और पानी की बोतलें यहां की बदहाल व्यवस्था की कहानी बयां करती हैं। अंदर बने टॉयलेट हों या पीछे का सुनसान खुला हिस्सा, हर जगह गंदगी और अव्यवस्था दिखाई देती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रात के समय यह परिसर असामाजिक तत्वों के लिए महफूज ठिकाना बन रहा है।

नए सामान रखे हैं, कई गायब होने की आशंका….
सबसे चिंता की बात यह है कि परिसर में लगाए जाने वाले कई सामान अब भी नए के नए पड़े हैं। कुछ सामग्री उपयोग में आने से पहले ही धूल खा रही है, जबकि कई सामान चोरी होने की बात भी सामने आ रही है। निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सीमेंट की बोरियां भी लंबे समय से पड़ी-पड़ी खराब हो चुकी हैं। लाइट और अन्य उपकरणों की हालत भी रखरखाव के अभाव में बिगड़ती जा रही है।

करोड़ों की लागत, लेकिन जिम्मेदारी का इंतजार
कला संकुल के निर्माण और शेष कार्य को लेकर विभागों के बीच समन्वय की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। स्मार्ट सिटी में फंड की उपलब्धता नहीं होने से काम प्रभावित हुआ है। वहीं, परिसर की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं दिखाई देती। नतीजा यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की जा रही संपत्ति धीरे-धीरे खराब होती जा रही है।

क्या थी योजना….
इसे इंदौर के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना
थी । ऑडिटोरियम, एम्फीथिएटर, मल्टीपरपज हॉल, डांस-ड्रामा हॉल, आर्ट गैलरी, लाइब्रेरी समेत कलाकारों व दर्शकों के लिए विभिन्न सुविधाएं प्रस्तावित थीं। फिलहाल, यह परियोजना अधूरे निर्माण और कागजी योजनाओं तक ही सीमित है।

20 करोड़ के कार्य अधूरे…
वर्तमान प्रोजेक्ट का शेष चरण लगभग ?20 करोड़ की अनुमानित लागत का है। इस चरण में इंटीरियर डिजाइनिंग एवं इंटीरियर वर्क, हॉल फायर-फाइटिंग, इलेक्टि्रकल तथा फायर इलेक्टि्रकल कार्य शामिल हैं। ये कार्य मुख्यतः ऑडिटोरियम हॉल, प्रैक्टिसिंग हॉल, आर्ट गैलरी एवं एम्फीथिएटर में किए जाने हैं।

शासन को प्रस्ताव…..
स्मार्ट सिटी सीईओ अर्थ जैन ने बताया कि संबंधित कार्य अभी पूरी तरह पूर्ण नहीं हुआ है। मौके पर कुछ अव्यवस्थाएं, गंदगी और आपत्तिजनक सामग्री मिली है। अवैध गतिविधियों की आशंका को देखते हुए सक्षम अधिकारी से चर्चा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर पुलिस में शिकायत की जाएगी। शेष कार्य के लिए अतिरिक्त फंड का प्रस्ताव आईडीए के माध्यम से शासन को भेजा जा चुका है और शासन स्तर पर कार्रवाई प्रचलन में है। फंड मिलते ही कार्य पूरा कराया जाएगा।

प्रशासन को पत्र भेजा
आईडीए के सीईओ परीक्षित झाड़े ने बताया कि इस मामले में प्रशासन को अवगत कराने के लिए लेटर भेजा गया है ।

सांस्कृतिक विकास का दावा खोखला
राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के विनीत तिवारी ने कहा कि इंदौर को सुसंस्कृत और संवेदनशील शहर बनाने के लिए संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। अधूरा कला संकुल अव्यवस्थाओं का शिकार है। राशि और जिम्मेदारी के फेर में अटकी परियोजना को प्रशासन तत्काल पूरा कराए, अन्यथा करोड़ों की संपत्ति बर्बाद होगी और सांस्कृतिक विकास का दावा खोखला साबित होगा।

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