नई दिल्ली, देश के बाजारों में पिछले कुछ महीनों के दौरान चीनी के भाव में लगभग 40 प्रतिशत तक की तेज वृद्धि देखने को मिली है, जिससे आम उपभोक्ताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बीच सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें आलोचकों के उन दावों का पूरी तरह खंडन किया गया है जिसमें यह कहा जा रहा था कि चीनी की कीमतों में आई यह तेजी एथेनॉल के उत्पादन के कारण हुई है।
कीमतें बढ़ने के वास्तविक कारण
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण गन्ने के उत्पादन में गिरावट और मांग में तेजी होना है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एथेनॉल के लिए चीनी डायवर्ट करने की हिस्सेदारी पिछले कुछ वर्षों में घटकर काफी कम हो गई है, और वर्तमान में देश में बनने वाले एथेनॉल का अधिकांश हिस्सा मक्के जैसे अन्य अनाजों से तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा, इस सीजन में गन्ने की फसल में बीमारियां लगने और अधिक बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है।
वैश्विक स्तर पर सप्लाई का दबाव
सरकार ने यह भी बताया कि चीनी की कीमतों में यह उछाल केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनियाभर में सप्लाई पर दबाव बना हुआ है। मौसम से जुड़ी चिंताओं और वैश्विक स्तर पर उत्पादन घटने के अनुमान के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि, सरकार ने आश्वस्त किया है कि देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में स्टॉक मौजूद है।

