दस साल में प्रदेश के टाइगर रिजर्व को जारी फंड का पेश करें डाटा: हाईकोर्ट 

जबलपुर। मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व को पर्याप्त फंड नही दिए जाने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस वी पी शर्मा की युगलपीठ ने प्रदेश में स्थित टाइगर रिजर्व को विगत दस सालों जारी किये गये फंड का डाटा पेश करने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को निर्देश जारी किये है।

मुम्बई के चेम्बूर निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती की तरफ से दायर याचिका में कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत हो चुनौती दी गयी थी। याचिका में कहा गया था कि कान्हा रिजर्व में अप्रैल व मई माह में आठ बाघ की मौत हुई है। मौतों से पहले उनकी शारीरिक स्थिति में स्पष्ट गिरावट देखी गयी गयी। इन मौतों का कारण संदिग्ध कैनाइन डिस्टेंपर वायरस माना गया है। याचिका में राहत चाही गयी है कि निवारण और निगरानी संबंधी उपायों का पालन सुनिश्चित किया जाये। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र व राज्य सरकार को बाघों की सुरक्षा के लिए निवारक और उपचारात्मक उपायों करने के निर्देश जारी किये थे। इसके अलावा कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की रोकथाम के लिए डॉग को कोरेंटाइन व वैक्सीनेशन जाने के निर्देश जारी किये थे।

याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि वायरस की रोकथाम के लिए कान्हा नेशनल पार्क में के सीमावर्ती क्षेत्रों में दो हजार श्वानों को वैक्सीनेशन किया गया है। याचिकाकर्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया कि प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व में वायरस फैलने का खतरा है। याचिकाकर्ता की तरफ से केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश के टाइगर रिजर्व को पर्याप्त फंड नही उपलब्ध करवाने तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद भी रिक्त पदों में नियुक्ति नही किये जाने का मुद्दा उठाया गया था। युगलपीठ ने प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी करते हुए याचिकाकर्ता के द्वारा उठाये गये मुद्दे पर केंद्र व राज्य सरकार को जवाब पेश करने निर्देश जारी किये थे।

याचिका पर बुधवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से उठाए गए मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह तथा अधिवक्ता प्रतीक रूसिया ने पैरवी की।

Next Post

ई-विकास 2.0 से सुदृढ़ हुई मप्र की उर्वरक वितरण प्रणाली  कृषकों को मिली चयन की छूट 

Wed Aug 19 , 2026
भोपाल। किसान-हितैषी प्राथमिकताओं के साथ ‘ई-विकास 2.0’ प्रभावी व्यवस्था प्रदेश के कृषकों को उनकी आवश्यकता एवं स्वेच्छा के अनुसार सहजता से उर्वरक उपलब्ध कराने की दिशा में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा ‘ई-विकास 2.0’ (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली को संपूर्ण राज्य में क्रियान्वित कर दिया […]

You May Like