
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में ओंकारेश्वर वन्यजीव अभ्यारण्य को अंतिम रूप से अधिसूचित करने में करीब चार दशक से हो रही देरी को चुनौती दी गई है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड भोपाल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित करते हुए तब तक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल दिल्ली निवासी नरेश चौधरी की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि नर्मदा सागर (इंदिरा सागर) बहुउद्देशीय परियोजना के लिए वर्ष 1987 में केंद्र सरकार ने 41,111 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि के डायवर्जन की मंजूरी दी थी। अधिवक्ता वरुण तन्खा ने तर्क दिया कि इसके क्षतिपूरक पर्यावरणीय उपाय के रूप में ओंकारेश्वर वन्यजीव अभ्यारण्य का गठन अनिवार्य था। इसके बावजूद प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होने तथा राज्य वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी के बाद भी अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हुई। याचिका के अनुसार प्रस्तावित अभ्यारण्य खंडवा और देवास जिलों में 614.07 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसमें कोई राजस्व गांव शामिल नहीं है। यह क्षेत्र रातापानी-खियोनी-ओंकारेश्वर-मऊ-धार-सरदारपुर वन्यजीव कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। याचिका में कहा गया कि खियोनी अभ्यारण्य में बाघों की बढ़ती संख्या और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण ओंकारेश्वर क्षेत्र बाघों के सुरक्षित आवागमन और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी भी अधिसूचना में देरी पर चिंता जता चुकी है। याचिकाकर्ता ने इस देरी को मनमाना और असंवैधानिक बताया है।
