बोगोटा, (वार्ता) कोलंबिया में आये 7.4 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 213 हो गयी है।
यह आंकड़ा एजेंसियों और स्थानीय अधिकारियों की रिपोर्टों के आधार पर सीएनएन ने आंकड़ा जारी किया है। प्रशासन का कहना है कि मौतों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि राहत एवं बचाव दल मलबे में जीवित बचे लोगों को तलाशने में जुटे हुए हैं।
भूकंप का केंद्र पर्वतीय चोको क्षेत्र के सैन जोस डेल पाल्मार में था, जिसके झटके पश्चिमी कोलंबिया से लेकर राजधानी बोगोटा तक महसूस किये गये। आपातकालीन कर्मी तबाही के बाद मलबे और अवशेषों को हटाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। सबसे ज्यादा मौते काली शहर में दर्ज की गयी हैं, जहां 95 लोगों की जान गयी है। इसके बाद परेरा में 66 लोगों की मौत हुई है। काली को छोड़कर वाये डेल कॉका प्रांत के अन्य हिस्सों में 38 और मौतों की रिपोर्ट है, जबकि क्विब्डो में नौ और मनिजालेस में पांच लोग मारे गये हैं।
‘कोलंबियन एसोसिएशन ऑफ कैपिटल सिटीज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, काली और परेरा सबसे गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं, जहां कई इमारतें ढह गयी हैं और लोगों के दबे होने की आशंका है। देश के दो सबसे बड़े शहरों बोगोटा और मेड्रिन में किसी बड़े नुकसान की रिपोर्ट नहीं है, हालांकि अधिकारी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
भूकंप बेहद दुर्गम चोको क्षेत्र में आया है, जहां सीमित सड़क संपर्क के कारण राहत कार्यों में रुकावट आ सकती है और पांच लाख से अधिक निवासियों तक मदद पहुंचने में देरी हो सकती है।
भूकंप के केंद्र से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित परेरा और मनिजालेस भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यहां लगभग 5,000 इमारतों को नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट है।
गत सात अगस्त को राष्ट्रपति का पदभार संभालने वाले अबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला ने राष्ट्रीय आपदा की घोषणा कर दी है, जबकि वैश्विक नेताओं ने राहत कार्यों में सहायता का आश्वासन दिया है।
तबाही के इस पैमाने ने बड़े भूकंपों से निपटने की कोलंबिया की तैयारियों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिये हैं। पेसिफिक ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित होने और तीन टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर होने के कारण कोलंबिया में भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है।
कोलंबियन एसोसिएशन ऑफ एनर्जी जियोलॉजिस्ट्स एंड जियोफिजिसिस्ट्स के निदेशक व भूवैज्ञानिक फ्लोवर रोड्रिगेज ने समाचार पत्र ‘एल पाइस’ को बताया कि अधिकारियों को भूकंप से जुड़े नियमों के आधार माने जाने वाले भूमि-उपयोग मानचित्रों को अपडेट करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “कोलंबिया को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट भू-उपयोग नीति बनानी होगी।”
एसोसिएशन ने जुलाई के अंत में ही सरकार से भूगर्भीय मैपिंग में सुधार करने की मांग की थी। साथ ही यह जानने के लिए एक केंद्रीय डेटाबेस न होने पर चिंता जतायी थी कि किन नगरपालिकाओं ने बुनियादी भूगर्भीय अध्ययन किया है। ऐसा डेटा मिलने से भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ के खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है।
कोलंबियन जियोलॉजिकल सर्विस के जॉन लोंडोनो ने ‘एल पाइस’ को बताया कि हालांकि नये निर्माणों के लिए भूकंप-रोधी नियमों में सुधार हुआ है, लेकिन मौजूदा कई पुरानी इमारतें अब भी तय मानकों पर खरी नहीं उतरती हैं। उन्होंने कहा, “कम आय वाले लोगों और सोशल हाउसिंग की एक बड़ी आबादी जिन मकानों में रहती है, वे इन मानकों को पूरा नहीं करते। यह सबसे वंचित और संवेदनशील वर्ग के लिए बड़ा खतरा है।”
सिविल इंजीनियर और भूकंप विज्ञान की प्रोफेसर गीना विलालोबोस ने कहा कि घटिया निर्माण पद्धतियां भी मजबूत इंजीनियरिंग मानकों को बेकार कर देती हैं। उन्होंने कहा कि कई बार समय या पैसा बचाने के लिए निर्माण परियोजनाओं में नक्शों का पालन नहीं किया जाता और भूकंप-रोधी नियमों को तोड़ दिया जाता है।
