बिदादी के किसानों को कर्नाटक हाईकोर्ट से अंतरिम राहत, भूमि अधिग्रहण पर लगायी रोक : निखिल कुमारस्वामी

बेंगलुरु, 04 अगस्त (वार्ता) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने प्रस्तावित बिदादी शहरीकरण परियोजना का विरोध कर रहे किसानों को अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जब तक मुआवजा तय नहीं हो जाता, तब तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे न बढ़ायी जाये। जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के युवा नेता निखिल कुमारस्वामी ने मंगलवार को यह दावा करते हुए इस आदेश को किसानों के जारी आंदोलन की ‘बड़ी जीत’ बताया।

रामनगर में पत्रकारों से बात करते हुए श्री कुमारस्वामी ने कहा कि इस अंतरिम आदेश ने शहरीकरण परियोजना का विरोध कर रहे किसानों के पक्ष में जेडीएस की लड़ी जा रही कानूनी लड़ाई को सही साबित किया है।

उन्होंने कहा, “उच्च न्यायालय ने मुआवजा तय होने तक सरकार को अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ाने से रोक दिया है। यह किसानों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण सफलता है और परियोजना के खिलाफ हमारे रुख को मजबूती प्रदान करती है।”

उन्होंने बताया कि अन्य प्रभावित गांवों के किसानों की याचिकाओं भी स्वीकार कर ली गयी है और इस सप्ताह के अंत में उन पर सुनवाई होने की संभावना है।

राज्य सरकार पर तीखा हमला करते हुए श्री कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए तथा किसानों की सहमति के बिना किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “सरकार 2013 के कानून का हवाला तो दे रही है लेकिन उसकी मूल भावना का ही उल्लंघन कर रही है। वह किसानों को विश्वास में लेने में विफल रही है और अदालत इस मामले पर करीब से नजर बनाये हुए है। हमें पूरा भरोसा है कि अंतिम फैसला किसानों के पक्ष में ही आयेगा।”

परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल उठाते हुए श्री कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि वृहत बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (जीबीडीए) के पास शहरीकरण को लागू करने के लिए संसाधन नहीं हैं और उसने बेंगलुरु महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बीएमआरडीए) की संपत्तियों को गिरवी रखकर धन जुटाया है।

उन्होंने दावा किया, “राज्य का खजाना खाली है। सरकार कुछ लोगों को मुआवजे का चेक बांटकर किसानों को विभाजित करने की कोशिश कर रही है लेकिन किसानों ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे।” उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों के खिलाफ काम करने वाली किसी भी सरकार को कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री कुमारस्वामी ने कहा कि यह सत्ताधारी दल का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा, “कुछ विधायकों की ओर से दी जा रही इस्तीफे की धमकियां वास्तविक हैं या महज दबाव बनाने की रणनीति, यह तय करना कांग्रेस का काम है। हम फिलहाल ‘देखो और इंतजार करो’ की स्थिति में हैं।”

 

 

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