नयी दिल्ली, 02 अगस्त (वार्ता) दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत संधू ने कहा है कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में और भी बड़ी भूमिका निभानी होगी। श्री संधू ने रविवार को किरोड़ी मल महाविद्यालय (केएमसी) के इन्क्यूबेशन सेंटर के उद्घाटन के अवसर पर यह बात कही । यह उद्घाटन दिल्ली विश्वविद्यालय के शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में कॉलेज के ओरिएंटेशन प्रोग्राम 2026 के दौरान हुआ।
उपराज्यपाल ने साइंस ब्लॉक लिफ्ट का भी उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में किरोड़ी मल महाविद्यालय शासी निकाय की अध्यक्ष प्रो वासुबेन त्रिवेदी, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव विकास गुप्ता, प्राचार्य प्रो दिनेश खट्टर, संकाय सदस्य, अभिभावक और छात्र शामिल हुए। नवाचार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टिप्पणियों का हवाला देते हुए श्री संधू ने कहा कि विश्वविद्यालय के परिसर ऐसे केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं, जहां युवा नये विचारों और तकनीकी सफलताओं को आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस नए इन्क्यूबेशन सेंटर से छात्रों के बीच अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। उपराज्यपाल ने नये बैच को संबोधित करते हुएकहा कि वह स्वयं दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और स्नातकोत्तर हैं और उन्होंने कभी विदेश में पढ़ाई नहीं की है। उन्होंने कहा, “विदेशों में राष्ट्र की सेवा में मैं जो कुछ भी योगदान दे पाया हूं, वह दिल्ली विश्वविद्यालय में रखी गयी नींव पर बना था।” उन्होंने छात्रों से भारत के संस्थानों और अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने का आग्रह किया। श्री संधू ने किरोड़ी मल कॉलेज को दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रमुख संस्थानों में से एक बताया और कहा कि इसकी विरासत दशकों में विद्वानों, सिविल सेवकों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों और कलाकारों को तैयार कर बनायी गयी है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान केवल बुनियादी ढांचे या रैंकिंग के बजाय खुद के तैयार किये गये नागरिकों की गुणवत्ता से विशिष्टता अर्जित करते हैं।
उन्होंने उन छात्रों और संकाय सदस्यों को भी बधाई दी, जिनके चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम में शोध पत्रों को मान्यता दी गयी थी और कहा कि यह शैक्षणिक पूछताछ की एक मजबूत संस्कृति को दर्शाता है। उपराज्यपाल ने साइंस ब्लॉक लिफ्ट को अधिक पहुंच और समावेशिता की दिशा में एक कदम बताते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को सभी छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने चाहिए। उन्होंने छात्रों से शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण, बौद्धिक जिज्ञासा और सत्यनिष्ठा विकसित करने का आग्रह किया।

