
इंदौर:एक ओर शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं. जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम नागरिक पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधे लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विकास कार्यों के नाम पर वर्षों पुराने और विकसित पेड़ों की कटाई इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही है.ताजा मामला न्यू पलासिया क्षेत्र की आंतरिक सड़क का है, जहां सड़क निर्माण के लिए 10 से अधिक बड़े पेड़ों को काटकर ठूंठ बना दिया गया, स्थानीय लोगों का कहना है कि बेहतर तकनीकी योजना के जरिए कई पेड़ों को बचाया जा सकता था या जरूरत पड़ने पर उनका ट्रांसप्लांटेशन किया जा सकता था.
पर्यावरणविद डॉ. दिलीप वागेला का कहना है कि पलासिया कभी अपनी सघन हरियाली और पुराने पेड़ों के लिए जाना जाता था, लेकिन विकास कार्यों के नाम पर लगातार परिपम् वृक्षों की कटाई हो रही है. उनका कहना है कि जहां संभव हो, परियोजनाओं के डिजाइन में बदलाव कर पेड़ों को बचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। केवल ट्रांसप्लांटेशन को समाधान नहीं माना जा सकता, क्योंकि पुराने पेड़ों का पारिस्थितिक महत्व और उनकी छाया का विकल्प तुरंत तैयार नहीं होता. उन्होंने कहा कि जिन पेड़ों को बचाना संभव न हो, उनका वैज्ञानिक तरीके से विशेषज्ञों की निगरानी में ट्रांसप्लांटेशन किया जाना चाहिए. यदि इंदौर को हरियाली में भी अग्रणी बनाना है, तो विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य होगा.
पुराने पेड़ बचाने कितने गंभीर प्रयास?
अब सवाल यह है कि जब शहर को हरियाली में भी नंबर वन बनाने का लक्ष्य है, तब विकास कार्यों के दौरान वर्षों पुराने पेड़ों को बचाने के लिए कितनी गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं।
