श्रीनगर, 09 जुलाई (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उम्मीद जतायी है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर 20 जुलाई को नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले एक दिवसीय प्रदर्शन को व्यापक राजनीतिक समर्थन मिलेगा। श्री अब्दुल्ला ने बुधवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि मंगलवार को नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में इस मांग को पुरजोर समर्थन मिला है। इस बैठक में धार्मिक संगठनों, व्यापार, शिक्षा, पर्यटन और सेवानिवृत्त नौकरशाहों समेत विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 170 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और करीब तीन घंटे तक सकारात्मक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में शामिल सभी लोग इस बात पर एकमत थे कि केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने में अब और देरी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से एक पंक्ति का प्रस्ताव पारित कर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा तुरंत बहाल करने की मांग की गयी है, साथ ही नागरिक समाज के सदस्यों ने 20 जुलाई के प्रस्तावित प्रदर्शन को अपना पूरा समर्थन दिया है।
गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली में प्रदर्शन करने का एलान किया है, ताकि राज्य के दर्जे की जल्द से जल्द बहाली के लिए दबाव बनाया जा सके।
श्री अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला न केवल ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं को, बल्कि जम्मू-कश्मीर की उन सभी राजनीतिक पार्टियों को भी न्योता भेजेंगे जो वर्तमान में विधानसभा में मौजूद हैं या अतीत में इसका हिस्सा रही हैं। इसके अलावा ‘इंडिया’ गठबंधन और राजग से बाहर के प्रमुख राजनीतिक दलों जैसे आम आदमी पार्टी (आप), शिरोमणि अकाली दल (एसएडी), बीजू जनता दल (बीजद), तेलंगाना के प्रमुख दलों, एआईएमआईएम और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के शीर्ष नेताओं को भी आमंत्रित किया जायेगा। सिंधु जल समझौते के निलंबन पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समझौते का जम्मू-कश्मीर के लोगों को कभी कोई फायदा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि हम पहले दिन से इसका विरोध करते आये हैं, क्योंकि इस संधि के कारण हमारा अपने ही दरियाओं पर कोई नियंत्रण नहीं रहा। श्री अब्दुल्ला ने कहा कि भारत की तरफ से स्थिति को भड़काने की कोई कोशिश नहीं की गयी है। भारत ने केवल सिंधु जल समझौते को निलंबित किया है, जबकि युद्ध की धमकियां सीमा पार से आ रही हैं और इस मुद्दे पर भारत सरकार पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है।
मौसम के हालात पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फोन कर केंद्र शासित प्रदेश, विशेषकर चेनाब घाटी और कठुआ जिलों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने गृह मंत्री को ताजा हालात से अवगत कराया, जिस पर गृह मंत्री ने केंद्र की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। अमरनाथ यात्रा के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर उच्चतम न्यायालय की निर्धारित सीमा लागू है और ‘श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड’ इसका पालन करने के लिए बाध्य है। बिना पंजीकरण यात्रा का प्रयास करने वाले लोगों से निपटना श्राइन बोर्ड की जिम्मेदारी है। इस वर्ष प्राकृतिक बर्फ के शिवलिंग के समय से पहले पिघलने पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह इंसानी नियंत्रण से बाहर की बात है। उन्होंने कहा कि शिवलिंग का निर्माण ईश्वर की देन है और यह कितने दिन तक रहेगा, इसे कोई तय नहीं कर सकता। इस बार यह छह दिनों तक रहा।

