संयुक्त राष्ट्र, 25 मई (वार्ता) लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआरसी) में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की निगरानी बढ़ाने के बाद इस देश में अब तक इबोला के 900 से अधिक संदिग्ध मामलों की पहचान की गयी है। इस प्रकोप का मुख्य केंद्र इटुरी प्रांत है, जहां पहले से ही करीब 50 लाख लोग लगातार जारी हिंसक संघर्ष में फंसे हुए हैं। इस वजह से शुरुआती दौर में मामले की पहचान करना मुश्किल हो गया है और संकट गहरा गया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसस ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा, “एक्टिव केस-खोज अभियानों के कारण कांगों में इबोला के कुल 904 संदिग्ध मामले सामने आये हैं। इनमें प्रयोगशाला की ओर से पुष्ट किये गये 101 संक्रमण के मामले भी शामिल हैं।”
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकोप का मुख्य केंद्र इटुरी प्रांत है, जहां पहले से ही करीब 50 लाख लोग लगातार जारी हिंसक संघर्ष में फंसे हैं। उन्होंने कहा कि इस कारण महत्वपूर्ण स्वास्थ्य और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं सहित हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा है। श्री टेड्रोस के अनुसार, मौजूदा असुरक्षा और डर की वजह से प्रभावित समुदायों में गहरा अविश्वास पैदा हो गया है। इस माहौल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रयासों को गंभीर रूप से बाधित किया है। इससे संक्रमितों के संपर्क में आये लोगों का पता लगाने और शुरुआती दौर में संक्रमण की पहचान का काम बेहद मुश्किल हो गया है। कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि तीन प्रभावित प्रांतों में इस घातक वायरस के कारण 204 लोगों की मौत हो चुकी है। डब्ल्यूएचओ ने 16 मई को बुंडिबुग्यो इबोला वायरस स्ट्रेन के कारण फैले इस प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (पीएचईआईसी) घोषित किया था।

