मुंबई (वार्ता) महाराष्ट्र में मुंबई के पायधुनी इलाके में पिछले महीने में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत के बाद उनके विसरा की जांच में तरबूज के नमूनों में जिंक फॉस्फाइड रसासन पाया गया है। यह एक ऐसा रसायन है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर चूहे मारने वाले ज़हर में किया जाता है।
फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है। रिपोर्ट मुंबई पुलिस को परिवार के सदस्यों की मौत के 11 दिन बाद सौंपी गई। इन सदस्यों ने कथित तौर पर बिरयानी और तरबूज खाया था, जिसके बाद पिछले महीने वे रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए गए थे।
एफएसल अधिकारियों के अनुसार, जिंक फॉस्फाइड एक अत्यंत विषैला पदार्थ है, जिसका उपयोग आमतौर पर चूहों और कीड़े-मकोड़ों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। कृषि क्षेत्रों और अनाज भंडारण केंद्रों में इसे एक ही खुराक में जान लेने वाले ज़हर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि माना जा रहा है कि इसी रसायन के कारण इन लोगों की मौत हुई है।
फोरेंसिक जांच के इन नतीजों ने सामान्य विषाक्त भोजन की पहले की आशंकाओं को खारिज कर दिया है। इसके चलते अब जांचकर्ता इस संभावना की पड़ताल कर रहे हैं कि यह मामला या तो ‘आत्महत्या के किसी समझौते’ का है, या फिर यह एक ‘हत्या’ है।
यह घटना गत 25 और 26 अप्रैल की दरमियानी रात को सामने आई। उस रात अब्दुल्ला डोकाडिया (40), उनकी पत्नी नसीम (35), और उनकी दो बेटियां आयशा (16) और ज़ैनब (13) दक्षिण मुंबई स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे। इससे कुछ समय पहले ही उन्होंने अपने रिश्तेदारों के लिए एक रात्रिभोज का आयोजन किया था।
पुलिस के अनुसार, रात्रिभोज में सभी मेहमान शामिल हुए थे, जबकि परिवार के सदस्यों ने कथित तौर पर आधी रात के बाद तरबूज खाया था।
शुरुआती जांच में फल में किसी प्रकार की मिलावट या संदूषण पर ध्यान केंद्रित किया गया था, क्योंकि परिवार के सदस्यों ने अपनी मौत से कुछ ही समय पहले तरबूज खाया था।
रिपोर्ट में जिंक फॉस्फाइड की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर यह ज़हर तरबूज के भीतर कैसे पहुंचा।
