ग्वालियर: जीवाजी विश्वविद्यालय में एक साल पहले लगाई गई धारा-52 को समाप्त कर दिया गया है। इस संबंध में राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे की ओर से एक पत्र जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु सचिवालय पहुंचा है। धारा-52 समाप्त होने के बाद इस दौरान गठित की गईं सभा, कार्यपरिषद और विद्या परिषद का अस्तित्व भी नहीं रहा है। इनके गठन की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की जाएगी। इस आदेश के बाद नए कुलगुरु की नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।
नए कुलगुरु की नियुक्ति तक प्रो. राजकुमार आचार्य ही जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु रहेंगे।उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा 18 फरवरी 2025 को अधिसूचना जारी कर विश्वविद्यालय में धारा-52 के प्रावधान प्रभावशील किए गए थे। अधिनियम के प्रावधान के अनुसार अधिसूचना की प्रभावशीलता एक वर्ष के लिए गई थी, इसकी अवधि 17 फरवरी को समाप्त हो गई है। राज्य शासन द्वारा इस अवधि में वृद्धि नहीं की गई है। इसके फलस्वरूप विश्वविद्यालय में 18 फरवरी से मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 52 के प्रावधान प्रभावशील नहीं रहे हैं।
इसके चलते अधिनियम के तहत गठित सभा, कार्यपरिषद एवं विद्या परिषद भी अस्तित्व मेें नहीं रहे हैं। इसलिए मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों के तहत सभा, कार्यपरिषद एवं विद्या परिषद के गठन की कार्रवाई भी शीघ्र शुरू की जाएगी।नियमित कुलगुरु की नियुक्ति तक प्रो. आचार्य पर ही रहेगा प्रभार इसके साथ ही एक और पत्र कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य को भेजा गया है जिसमें लिखा गया है कि विश्वविद्यालय में नियमित कुलगुरु की नियुक्ति तक वह कुलगुुरु के रूप में कार्य करते रहेंगे।
