
कटनी/स्लीमनाबाद।मध्यप्रदेश के जल इतिहास में नया कीर्तिमान जुड़ने जा रहा है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) द्वारा कटनी जिले के स्लीमनाबाद में निर्मित की जा रही देश की सबसे लंबी जल सुरंग अब अंतिम चरण में है। करीब 30 मीटर जमीन के नीचे बनाई जा रही 12 किलोमीटर लंबी यह टनल जबलपुर (बरगी) से नर्मदा जल को सीधे रीवा तक पहुंचाएगी। परियोजना में अब केवल लगभग 400 मीटर खुदाई शेष है और लक्ष्य अप्रैल 2026 तक कार्य पूर्ण करने का रखा गया है।
टनल पूरी होते ही जबलपुर, कटनी और सतना जिलों की करीब 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का सीधा लाभ मिलेगा। यह परियोजना बरगी व्यपवर्तन योजना का अहम हिस्सा है। दायीं तट मुख्य नहर से नर्मदा का पानी प्राकृतिक ढाल (ग्रेविटी सिस्टम) से आगे बढ़ेगा, जिससे अतिरिक्त पंपिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बाणसागर क्षेत्र की समस्या का समाधान
सतना और रीवा क्षेत्र में बाणसागर परियोजना होने के बावजूद कम जलस्तर के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता। नर्मदा का ऊंचा जलस्तर इस समस्या का स्थायी समाधान बनेगा। फिलहाल जबलपुर जिले के सिहोरा सहित अन्य क्षेत्रों में इसी योजना से लगभग 60 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो रही है।
पहाड़ चीरकर बन रही सुरंग
स्लीमनाबाद के सलैया फाटक और खिरहनी क्षेत्र में कठोर चट्टानों को काटकर यह सुरंग बनाई जा रही है। अमेरिका और जर्मनी से लाई गई दो अत्याधुनिक टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) से खुदाई की जा रही है। डाउन स्ट्रीम में 5500 मीटर और अप स्ट्रीम में 5100 मीटर खुदाई पूरी हो चुकी है। अब मात्र 400 मीटर का काम बाकी है।
2011 का लक्ष्य, 2026 में पूर्णता
परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी और इसे 2011 तक पूरा किया जाना था, लेकिन स्लीमनाबाद क्षेत्र की जटिल भूगर्भीय संरचना सबसे बड़ी बाधा बनी। यहां 8 से 10 मीटर खुदाई पर ही पानी निकलने लगता है, जबकि टनल की गहराई 30 मीटर है। इसके साथ ही सिंकहोल (अचानक जमीन धंसने) की समस्या और कोविड काल के कारण भी कार्य प्रभावित हुआ। एनवीडीए के अनुसार वर्ष 2021 के बाद निर्माण कार्य में तेजी आई है।
सुरक्षा के लिए टनल के ऊपर 20 मीटर चौड़ी भूमि पट्टी अस्थायी रूप से अधिग्रहित की गई है। किसानों को तीन फसलों का मुआवजा दिया जा रहा है और जहां भी जमीन धंसने का खतरा होता है, वहां तत्काल भराव कर स्थिति नियंत्रित की जाती है।
हर मीटर खुदाई पर भारी खर्च
टनल निर्माण में लगी टीबीएम मशीनों के कटर हेड में 56 कटर लगे हैं। कठोर चट्टानों के कारण एक से डेढ़ मीटर खुदाई में ही 5 से 6 कटर टूट जाते हैं, जिससे करीब 10 लाख रुपये तक का अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है। इसके बावजूद निर्माण कार्य लगातार जारी है।
फैक्ट फाइल
कुल लक्ष्य: 2.45 लाख हेक्टेयर
जबलपुर – 60,000 हेक्टेयर
कटनी – 21,823 हेक्टेयर
सतना – 1,59,655 हेक्टेयर
रीवा – 3,532 हेक्टेयर
बयान
एनवीडीए के कार्यपालन यंत्री सहज श्रीवास्तव ने बताया कि स्लीमनाबाद में टनल निर्माण अंतिम चरण में है। लगभग 400 मीटर कार्य शेष है, जिसे अप्रैल 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद चार जिलों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का सीधा लाभ मिलेगा।
