नई दिल्ली | भारत सरकार ने बजट 2026-27 के जरिए देश को तकनीक की दुनिया का सिरमौर बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। केंद्र ने घोषणा की है कि भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने वाले विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को साल 2047 तक ‘टैक्स हॉलिडे’ (कर में पूर्ण छूट) दी जाएगी। इस योजना के तहत, जो कंपनियां भारत से अपनी सेवाएं देंगी, उन्हें अगले दो दशकों तक अपनी कमाई पर कोई आयकर नहीं देना होगा। सरकार का लक्ष्य इस नीति के माध्यम से वैश्विक कंपनियों को दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षित करना और भारत को विश्व का सबसे बड़ा क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्र बनाना है।
वर्तमान में भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र में लगभग 5.8 लाख करोड़ रुपये ($70 बिलियन) का निवेश प्रक्रियाधीन है, जबकि 90 बिलियन डॉलर की नई परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार हो चुकी है। भारत की मौजूदा क्लाउड डेटा सेंटर क्षमता 1,280 मेगावाट है, जिसके 2030 तक पांच गुना तक बढ़ने का अनुमान है। इस टैक्स छूट से वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। संयुक्त राष्ट्र (UNCTAD) के आंकड़े बताते हैं कि 2025 के बड़े प्रोजेक्ट्स में 20% हिस्सेदारी डेटा सेंटर्स की थी, जिसे देखते हुए भारत का यह दांव उसे इस वैश्विक रेस में सबसे आगे खड़ा कर सकता है।
तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ भी लॉन्च किया है, जिसके लिए ₹1,000 करोड़ का प्रारंभिक फंड आवंटित किया गया है। यह मिशन मुख्य रूप से देश के भीतर ही चिप बनाने वाली मशीनों और उपकरणों के डिजाइन पर केंद्रित होगा। साथ ही, भारत के विशाल आईटी सेक्टर (जो $220 बिलियन का निर्यात करता है) के लिए 15.5 प्रतिशत का ‘सेफ हार्बर मार्जिन’ प्रस्तावित किया गया है। इन फैसलों से न केवल टैक्स विवाद कम होंगे, बल्कि भारत में व्यापार करना (Ease of Doing Business) और भी आसान हो जाएगा, जिससे लाखों नए रोजगार सृजित होंगे।

