साहिल मर्डर केस: प्रेम प्रसंग में हुई थी हत्या, न्यायालय ने आरोपियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

सीहोर। वर्ष 23 के अंतिम दिन हुई युवक साहिल की हत्या के बहुचर्चित मामले में प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती स्मृता सिंह ठाकुर, विशेष न्यायालय, जिला सीहोर ने बड़ा फैसला सुनाया.

न्यायालय ने आरोपी साजिद, जुबैर और आमिर निवासी सिपाहीपुरा को धारा 302 भादवि के तहत आजीवन कारावास तथा धारा 201 भादवि के तहत 7 वर्ष के कठोर कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया. अभियोजन के अनुसार 31 दिसंबर 23 की रात करीब 11 बजे साहिल घर से मंडी चौराहे जाने की बात कहकर बाइक से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा. पिता रहमत अली ने रात में उसकी तलाश की, फोन भी लगाया, परंतु संपर्क नहीं हो सका. रात लगभग 3 बजे उसका मोबाइल बंद हो गया. अगले दिन थाना मंडी में गुमशुदगी दर्ज कराई गई. 2 जनवरी 24 को कब्रिस्तान नाले के पास एक अधजला शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली.मौके पर पहुंचे परिजनों ने छल्ले, बेल्ट के बक्कल और अंगूठी से शव की पहचान साहिल के रूप में की. पीएम रिपोर्ट में चाकू से वार कर हत्या और बाद में शव जलाने की पुष्टि हुई. कॉल डिटेल और साक्षियों के बयान के आधार पर पुलिस को पता चला कि साहिल को अंतिम बार उसकी महिला मित्र ने देखा था. उसके सामने साहिल और आरोपी साजिद के बीच विवाद हुआ था. जांच में सामने आया कि साजिद उक्त युवती से प्रेम करता था और विवाह करना चाहता था. इसी कारण उसने जुबैर के साथ मिलकर नाले के पास साहिल की चाकू मारकर हत्या कर दी.

हत्या के बाद आरोपियों ने आमिर को बुलाया और शव को एक्टिवा से नाले के पास ले जाकर जला दिया. मृतक की बाइक और घटना में प्रयुक्त चाकू पानी से भरी बाउंड्री में फेंक दिए, जबकि खून से सने कपड़े झाडिय़ों में छिपा दिए गए. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चाकू, बाइक, खून लगे कपड़े और अन्य सामग्री बरामद की. आमिर से मृतक का मोबाइल जब्त किया गया. डॉक्टर की रिपोर्ट में बरामद चाकू से मृत्यु होना पाया गया. डीएनए जांच में पुष्टि हुई कि शव रहमत अली और शहजादी का पुत्र साहिल ही था. कॉल डिटेल, टॉवर लोकेशन और साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया.

15 साक्षियों के बयान के बाद आया फैसला

विचारण के दौरान अभियोजन ने 15 साक्षियों के बयान दर्ज कराए। अंतिम तर्कों के पश्चात 13 फरवरी 2026 को न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और अन्य दंड से दंडित किया. प्रकरण में अभियोजन पक्ष का संचालन सेवानिवृत्त डीपीओ अनिल बादल एवं एडीपीओ आशीष त्यागी द्वारा किया गया.

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