नयी दिल्ली, (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार से लद्दाखी सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनकी लगातार निवारक हिरासत पर फिर से विचार करने को कहा।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 के तहत उनकी हिरासत को अवैध बताया गया था।
वांगचुक को 26 सितंबर को लद्दाख में राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिया गया था, जो बाद में हिंसक हो गए थे। बाद में उन्हें जोधपुर शिफ्ट कर दिया गया। न्यायमूर्ति वराले ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज से पूछा कि क्या केंद्र सरकार वांगचुक की हिरासत जारी रखने की आवश्यकता पर, खासकर उनके स्वास्थ्य को देखते हुए, फिर से विचार कर सकती है।
पीठ की यह टिप्पणी तब आयी जब न्यायालय ने पाया कि वांगचुक के लिए विशेषज्ञ मेडिकल जांच की मांग को लेकर पिछला आवेदन, जिन्होंने बार-बार पेट की बीमारियों की शिकायत की थी, पहले ही स्वीकार कर लिया गया था और एक मेडिकल रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखी गई थी।
न्यायमूर्ति वराले ने हिरासत की अवधि का जिक्र करते हुए कहा कि 26 सितंबर, 2025 का हिरासत आदेश लगभग पांच महीने से लागू है।
पीठ ने पूछा “विशेष रूप से उनके स्वास्थ्य और स्थिति को देखते हुए, जो निश्चित रूप से बहुत अच्छी नहीं है… क्या सरकार के लिए फिर से सोचने की कोई संभावना है?”
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने इस टिप्पणी पर सहमति जताई।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि यह मुद्दा सरकार के लिए भी चिंता का विषय है और कहा कि वह निर्देश लेंगे।