सहकारिता पर राष्ट्रीय कार्यशाला में डाटाबेस की मजबूती, बहु-राज्यीय सहकारी समितियों में सुधार पर बल

उदयपुर (राजस्थान), 10 जनवरी (वार्ता) सहकारिता क्षेत्र पर यहां दो दिवसीय राष्ट्रीय-स्तरीय कार्यशाला एवं समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस को सुदृढ़ करने और बहु-राज्य सहकारी समितियों में सुधारों को आगे बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की शनिवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार “सहकार से समृद्धि” के मोदी सरकार के आह्वान की भावना के अनुरूप सहकारी संस्थाओं को समावेशी विकास, ग्रामीण समृद्धि तथा जमीनी स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण का प्रमुख माध्यम बनाने के केन्द्र सरकार के वृहद उद्येश्यों के साथ यह आयोजन शुक्रवार को सम्पन्न हुआ। विज्ञप्ति में कहा गया है , ‘ कार्यशाला का एक अन्य प्रमुख फोकस राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस को सुदृढ़ करने और बहु-राज्य सहकारी समितियों में सुधारों को आगे बढ़ाने पर रहा।”
इस कार्यक्रम में सहकारी समितयों के सचिवों तथ रजिस्ट्रार समेत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और सहकारिता क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इसका उद्घाटन सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किया गया। राजस्थान सरकार की सहकारिता सचिव आनंदी ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया।

केंद्रीय सहकारिता सचिव भूटानी ने कहा कि सरकार राज्यों के साथ मिल कर और उनके साथ विचार विमर्श कर सहकारिता क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए नवाचारी दृष्टिकोण अपनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं की उपलब्धियों को पारंपरिक एवं सोशल मीडिया के माध्यम से उजागर करने की आवश्यकता है। उन्होंने बनासकांठा डेयरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक सूखा-प्रभावित ज़िले ने सशक्त और एकीकृत मूल्यवर्धन श्रृंखला के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 90 लाख लीटर दूध उत्पादन हासिल किया, जो सहकारी संस्थाओं की परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने ग्रामीण एवं शहरी सहकारी बैंकों के लिए नियमों को सरल बनाने और प्रशासनिक कमियों को दूर करने हेतु आरबीआई एवं वित्त मंत्रालय के साथ मंत्रालय के सतत संवाद को भी रेखांकित किया। उन्होंने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और वैल्यू-चेन विकास जैसी पहलों के माध्यम से सहकारिता क्षेत्र के आर्थिक योगदान को तीन गुना करने के सरकार के लक्ष्यों को दोहराया।

कार्यशाला के एक सत्र में सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई, जिनमें प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (आडीबी) तथा सहकारी समितियों के पंजीयक कार्यालयों का कंप्यूटरीकरण, तथा मॉडल पैक्स , बहुउद्देशीय डेयरी सहकारी समिति और बहुउद्देशीय मत्स्य सहकारी समिति जैसी योजनाओं का कार्यान्वयन शामिल है। चर्चाओं में सहकारिता क्षेत्र के अंतर्गत विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण पहल तथा पैक्स द्वारा प्रदान की जा रही कॉमन सर्विस सेंटर, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र जैसी अतरिक्त सेवाओं विस्तार पर भी विचार-विमर्श हुआ। सहकारी बैंकिंग सुधारों और राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड तथा भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड जैसी डिजिटल पहलों के साथ-साथ श्वेत क्रांति 2.0 के संवर्धन पर भी चर्चा की गई। कार्यशाला में सशक्त नेतृत्व, सुशासन और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी , त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद और वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान जैसे संस्थानों के माध्यम से क्षमता निर्माण पर बल देते हुए भविष्य-तैयार सहकारिताओं के निर्माण पर भी जोर दिया गया, साथ ही महिलाओं, युवाओं और वंचित वर्गों के लिए अवसरों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया।

कार्यशाला के अंतिम दिन कल “सहकार से समृद्धि – पैक्स आगे” शीर्षक से एक समर्पित सत्र आयोजित किया गया, जिसमें लक्ष्य पर आधारित पहलों के माध्यम से प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को सशक्त बनाने पर फोकस किया गया। विचार-विमर्श के दौरान प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के पुनरुद्धार में सहकारी बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया, जिसमें राज्यों ने अपने अनुभव और सर्वोत्तम कार्यपद्धतियाँ साझा कीं। इस दौरान तमिलनाडु की ओर से कैशलेस पैक्स और प्रबंधन सूचना प्रणाली के कार्यान्वयन, आंध्र प्रदेश की ओर से सहकारी संस्थाओं के लिए स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र के संवर्धन, जम्मू एवं कश्मीर द्वारा प्रस्तुत ज़िला-विशिष्ट व्यवसायिक योजनाएँ, नाबार्ड द्वारा प्रस्तुत मॉडल सहकारी गाँव, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रस्तुत सदस्यता अभियान की पहल तथा नाबार्ड की परामर्श इकाई नाबकॉनस द्वारा आधुनिक भंडारण और आपूर्ति-श्रृंखला एकीकरण पर प्रस्तुतियां दी गयीं। समापन सत्र में सहकारिता मंत्रालय के अपर सचिव पंकज कुमार बंसल ने सामूहिक संस्थाओं के बीच सहयोग विषय पर चर्चा की अध्यक्षता की, जिसमें स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को पैक्स के साथ एकीकृत करने तथा एनसीडीसी योजनाओं के तहत पहुँच को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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