पाकिस्तान एयरलाइंस के निजीकरण में सेना की ‘बैकडोर’ एंट्री, आरिफ हबीब कंसोर्टियम ने जीती 135 अरब की बोली: असीम मुनीर का एविएशन सेक्टर पर कब्ज़ा

नई दिल्ली। 26 दिसंबर, 2025। पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइन ‘पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस’ (PIA) के निजीकरण की प्रक्रिया में एक बड़ा मोड़ आ गया है। आरिफ हबीब कंसोर्टियम ने 135 अरब रुपये की भारी-भरकम बोली लगाकर एयरलाइन में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली है। चौंकाने वाली बात यह है कि बोली प्रक्रिया से खुद को अलग करने वाली ‘फौजी फर्टिलाइजर कंपनी’ (FFPL), जो सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना के ‘फौजी फाउंडेशन’ से जुड़ी है, अब इस कंसोर्टियम की आधिकारिक साझेदार बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेना प्रमुख असीम मुनीर ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत प्रत्यक्ष बोली से नाम वापस लिया था, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निजीकरण की छवि खराब न हो और बाद में मैनेजमेंट में हिस्सेदारी सुनिश्चित की जा सके।

आरिफ हबीब कंसोर्टियम ने घोषणा की है कि वे फौजी फर्टिलाइजर के साथ मिलकर पहले साल में ग्राउंड ऑपरेशंस और सेवाओं को अपग्रेड करने के लिए 125 अरब रुपये का निवेश करेंगे। यह बोली सरकार के अनुमानित 3200 करोड़ रुपये के मुकाबले 4320 करोड़ रुपये रही, जिससे सरकारी खजाने को उम्मीद से अधिक फायदा हुआ है। इस साझेदारी के जरिए पाकिस्तानी सेना अब न केवल उवर्रक और अन्य उद्योगों में, बल्कि देश के एविएशन सेक्टर में भी सीधे तौर पर कॉर्पोरेट विशेषज्ञता और मैनेजमेंट का हिस्सा होगी। नीलामी की शर्तों का चतुराई से उपयोग करते हुए जीतने वाली कंपनी ने अपनी पसंद के साझेदार के रूप में सेना से जुड़ी कंपनी को शामिल किया है।

पाकिस्तान में निजीकरण का यह रास्ता मुख्य रूप से आईएमएफ (IMF) की शर्तों को पूरा करने के लिए अपनाया गया था। यदि सेना सीधे तौर पर नीलामी जीतती, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर गलत संदेश जाता कि सरकारी संपत्ति को केवल एक सरकारी संस्थान को ही हस्तांतरित किया गया है। अपनी प्रतिष्ठा और असीम मुनीर की साख को बचाने के लिए सेना ने ‘बैकडोर’ एंट्री का रास्ता चुना। यदि वे व्यक्तिगत रूप से बोली हार जाते, तो भविष्य में वापसी का कोई मौका नहीं रहता। अब इस गठबंधन के जरिए पाकिस्तानी सेना ने न केवल एयरलाइन पर अपना प्रभाव जमा लिया है, बल्कि वित्तीय घाटे से जूझ रहे पीआईए के नियंत्रण की बागडोर भी अपने हाथों में ले ली है।

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