जबलपुर: 20 दिसंबर को हवाबाग चर्च में घटित कथित धर्मांतरण प्रकरण को लेकर शासकीय दृष्टि वायितार्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य शिवेंद्र परिहार के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। प्रभारी प्राचार्य का कहना है कि उन्हें छात्रों के वहां जाने की कोई जानकारी नहीं थी, जिससे संस्था पर उनके नियंत्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार 20 दिसंबर को लगभग 35 छात्र हवाबाग चर्च गए थे, जिनमें कुछ नाबालिग और आदिवासी दृष्टिबाधित छात्र भी शामिल थे। आरोप है कि बच्चों को सुविधाओं का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
छात्रों को ले जाने नहीं ली कोई अनुमति
यह भी जानकारी सामने आई है कि छात्रों को ले जाने के लिए संस्था में न तो कोई आवेदन दिया गया था और न ही किसी प्रकार की संस्था से अनुमति ली गई थी। छात्रों को ऐसे ही ले जाने को लेकर लोगों ने संस्था में नियम विरुद्ध कार्य और भारी प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह भी आरोप सामने आया है कि प्रभारी प्राचार्य जांच को प्रभावित कर रहे हैं।
दो संस्थाओं का संभाल रहे प्रभार
यह भी आरोप है कि प्रभारी प्राचार्य शिवेंद्र सिंह परिहार एक साथ दो संस्थाओं के प्रभार में हैं, जो पीएमश्री महाकौशल कॉलेज में प्रोफेसर पद पर और शासकीय दृष्टि वायितार्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी कार्यरत हैं। बताया गया कि वे प्रतिदिन दोपहर बाद ही विद्यालय पहुंचते हैं। ऐसे में विद्यालय में उनकी उपस्थिति और कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
इनका कहना है
बच्चों को व्यक्तिगत आमंत्रण मिला था, वह स्वयं के व्यय से वहां गए थे, संस्था को इसकी जानकारी नहीं थी।
शिवेंद्र सिंह परिहार, प्रभारी प्राचार्य
शासकीय दृष्टिबधितार्थ विद्यालय
