जुलाई में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात बढ़ा

कोलकाता, 30 अगस्त (वार्ता) अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, ब्राजील और चीन जैसे प्रमुख बाजारों में माल ढुलाई को बढ़ावा मिलने से भारत द्वारा इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात जुलाई में चालू वित्त वर्ष 2025-26 में पहली बार 10 अरब अमरीकी डॉलर को पार कर गया। यह जानकारी भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (ईईपीसी) ने शनिवार को दी।
जुलाई 2025 में भारतीय इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात कुल 10.43 अरब अमेरिकी डॉलर रहा जो जुलाई 2024 में 9.16 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 13.81 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस वर्ष जुलाई में अमेरिका में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 19 प्रतिशत बढ़कर 1.81 अरब डॉलर हो गया जबकि जुलाई 2024 में यह 1.52 अरब डॉलर था।
जुलाई 2025 में जर्मनी में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 37.8 प्रतिशत बढ़कर 457.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। इसी अवधि में ब्रिटेन में निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 46.5 प्रतिशत बढ़कर 402.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इस वर्ष जुलाई में जापान और ब्राजील में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 55.2 प्रतिशत और 26.4 प्रतिशत बढ़कर क्रमशः 256.6 लाख अमरीकी डॉलर और 227.8 लाख अमरीकी डॉलर रहा।
इस वर्ष जुलाई में चीन में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 35.8 प्रतिशत बढ़कर 263.9 लाख अमेरिकी डॉलर हो गया। हालांकि जुलाई 2025 में तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और सिंगापुर जैसे कुछ प्रमुख देशों में इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई। तुर्की में निर्यात में भारी गिरावट का कारण भारत के साथ भू-राजनीतिक तनाव हो सकता है। इस वर्ष जुलाई में, तुर्की में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 31 प्रतिशत घटकर 18.31 करोड़ डॉलर रह गया जबकि जुलाई 2024 में यह 26.58 करोड़ डॉलर था।
जुलाई 2025 में, 34 में से 29 इंजीनियरिंग पैनलों में पिछले वर्ष की तुलना में सकारात्मक वृद्धि देखी गई जबकि पांच पैनलों के निर्यात में गिरावट देखी गई जिसमें मुख्य रूप से विमान एवं अंतरिक्ष यान, जहाज एवं नाव, जस्ता और उसके उत्पादों शामिल हैं।
कुल मिलाकर इंजीनियरिंग निर्यात में 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई क्योंकि यह 2025-26 की अप्रैल-जुलाई अवधि में 39.34 अरब अमरीकी डॉलर हो गया जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान 37.08 अरब अमरीकी डॉलर था।
जुलाई 2025 में अंतरराष्ट्रीय व्यापार अमेरिका की बढ़ती टैरिफ, क्षेत्रीय भिन्नता एवं राजनीतिक अनिश्चितता के तनाव से प्रभावित था। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, 2025 में वैश्विक वस्तु व्यापार में 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज होने का अनुमान है तथा अगर व्यापार तनाव या नए टैरिफ तीव्र होते हैं तो इसमें 1.5 प्रतिशत तक की और अधिक गिरावट हो सकती है।
इंजीनियरिंग निर्यात आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा, “दुनिया आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन एवं प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती अंतर्मुखी व्यापार नीति को देख रही है जिससे स्थापित उत्पादन नेटवर्क को खतरा हो रहा है।”
उन्होंने कहा, “भारत को भी भारी अमेरिकी आयात शुल्क का सामना करना पड़ रहा है जिससे हमारा भविष्य बहुत अनिश्चित हो गया है क्योंकि अमेरिका हमारा प्रमुख निर्यात साझेदार है। इस स्थिति में हमें वैश्विक बाज़ार में बने रहने और अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अपने बाज़ारों एवं उत्पादों में विविधता लाने की आवश्यकता है। वर्तमान में विदेश नीति एवं ऋण तक पहुंच दोनों के संदर्भ में भारत सरकार का समर्थन बहुत महत्वपूर्ण होगा।”
अगर क्षेत्रवार अवलोकन किया जाए तो उत्तरी अमेरिका ने अप्रैल-जुलाई 2025 में 22 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ इंजीनियरिंग निर्यात गंतव्य में अपना पहला स्थान बनाए रखा, इसके बाद यूरोपीय संघ (18 प्रतिशत) और डब्ल्यूएएनए (14 प्रतिशत) का स्थान रहा। कुल व्यापारिक निर्यात में इंजीनियरिंग वस्तुओं की हिस्सेदारी जुलाई 2024 में 26.4 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई 2025 में 28 प्रतिशत हो गई।
हालांकि, ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारत से अमेरिका जाने वाले माल पर 27 अगस्त, 2025 से प्रभावी 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने के कारण इंजीनियरिंग निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है।
श्री चड्ढा ने कहा, “25 प्रतिशत से ऊपर लगाया गया अतिरिक्त शुल्क से कई इंजीनियरिंग वस्तुओं के अमेरिकी बाजार में अप्रतिस्पर्धी होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।”

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