श्रावण माह विशेष: कंठाल किनारे बसा है नीलकंठेश्वर का धाम

सुसनेर: इंदौर रियासत की महारानी देवी अहिल्याबाई ने तहसील में कई जगहों पर शिव मंदिरों का निर्माण कराया था. वर्तमान में ये सभी मंदिर शासन के आधिपत्य में होकर धर्मस्व विभाग के अधीन है. इन्ही में से एक नगर के मेला ग्राउंड क्षेत्र में स्थित नीलकण्ठेश्वर महादेव मंदिर है. इस मंदिर के आसपास कई और शिवालय भी है. इस कारण से इसे पुराने समय में शिव का बाग भी कहा जाता था.

बाद में नगर परिषद द्वारा इस स्थान पर वार्षिक रामनवमी मेले की शुरूआत कर दी गई. तब से इसे इस जगह का नाम मेला ग्राउंड पड़ गया. मंदिर कंठाल नदी के किनारे पश्चिम दिशा की और बसा है. इस मंदिर से प्रतिवर्ष भादौ के पहले सोमवार पर शिव भक्त मंडल के तत्वावधान में नीलकंठेश्वर महादेव की शाही सवारी भी निकाली जाती है. इस दिन भगवान अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं. श्रावण मास के अवसर पर हम आपको सुसनेर क्षेत्र के ऐसे प्राचीन शिवालयों से अवगत करा रहे हैं. जो न सिर्फ हमारी धार्मिक आस्था के केन्द्र बिंदु है बल्की हमारे प्राचीनतम इतिहास को भी सहेजे हुए है.
यहीं से ओंकारेश्वर के लिए निकलती है कावड़ यात्रा
मेला ग्राउंड क्षेत्र यानी के शिव के बाग में नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के अलावा ओंकारेश्वर महादेव मंदिर, जयेश्वर महादेव मंदिर भी है. बोलबम कावड़ यात्रा संघ के द्वारा विगत कई वर्षो से कावड़ यात्रा इसी नीलकंठेश्वर मंदिर से निकाली जाती आ रही है. कावड़ यात्री मंदिर में महारूद्राभिषेक कर कंठाल नदी के जल से 300 किलोमीटर पैदल चलकर ओंकारेश्वर महादेव ज्योर्तिलिंग का अभिषेक करते हैं.
पूरे श्रावण मास चलता है महारूद्राभिषेक
विगत 3 वर्षो से इस मंदिर से जडे युवा शिव भक्तों ने नई पहल की शुरूआत की. जिसके तहत हर साल श्रावण मास के दौरान पूरे महिने महारूद्राभिषेक किया जाता है. प्रतिवर्ष गुरू पूर्णिमा से महारूद्राभिषेक की शुरूआत होती है. जो श्रावण मास की समाप्ति के बाद महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ समापन होता है. रविवार को मंदिर परिसर में 11 वां महारूद्राभिषेक सम्पन्न किया गया. पंडित ब्रह्मप्रकाश भट्ट अभिषेक की किया वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न करवा रहे हैं.

जनसहयोग से मंदिर में हो रहे निर्माण कार्य

यह मंदिर धर्मस्व विभाग के अधीन होकर भी प्रशासन की उपेक्षा का शिकार है. लेकिन बीते कुछ सालों से मंदिर के प्रति श्रृद्धालुओं की आस्था जागरूक हुई और अब मंदिर का धीरे-धीरे करके जीर्णोद्धार भी किया जा रहा है. जन सहयोग की राशि से अभी तक मंदिर का गर्भगृह, शिखर की मरम्मत व मंदिर परिसर एवं सीढिय़ो की मरम्मत करके टाईल्स भी लगवाई गई है. यहां पर युवाओं ने शिवभक्ति का बीड़ा उठा रखा है.

मंदिर की जमीन पर मंडी का कब्जा

नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के नाम पर कई जगह पर जमीने भी दर्ज है. इनमें से इन्दौर कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंदिर के नाम की करीब 10 बीघा भूमि कृषि उपज मंडी के कब्जे में है. इस बात की जानकारी प्रशासन के जिम्मेदारों को भी है. किन्तु मंदिर की पुजारन विधवा महिला के होने के कारण मंदिर की जमीन को कृषि उपज मंडी से मुक्त कराने की कोई ठोस पहल आज तक नहीं हो पाई है.

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