नयी दिल्ली, 16 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि देश में छोटी जोत के हिसाब से छोटी मशीनें तैयार की जायेंगी तथा किसानों के साथ खाद-बीज आदि में धोखाधड़ी रोकने के लिए एक टोल फ्री नंबर जारी किया जाएगा। उन्होंने वैज्ञानिकों से प्राकृतिक खेती के जरिए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद की दिशा में काम करने का आह्वान किया।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 97वें स्थापना दिवस के अवसर पर यहां पूसा के एन.ए.एस.सी. कॉम्प्लेक्स स्थित भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने उत्कृष्ट योगदान के लिए वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान पुरस्कार भी वितरित किये। उत्कृष्ट महिला वैज्ञानिक, युवा वैज्ञानिक, नवाचार वैज्ञानिक सहित विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार वितरण किये गये। केंद्रीय कृषि मंत्री ने परिसर में आयोजित विकसित कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। साथ ही विभिन्न कृषि उत्पादों और प्रौद्योगिकी की जानकारी भी ली। कार्यक्रम में 10 कृषि प्रकाशनों का विमोचन किया गया। साथ ही कृषि क्षेत्र के विभिन्न समझौता ज्ञापनों का विमोचन भी किया गया। श्री चौहान ने समस्त देशवासियों की तरफ से स्थापना दिवस पर आईसीएआर की टीम को बधाई दी।
उन्होंने वैज्ञानिकों को आधुनिक महर्षि की संज्ञा देते हुए कहा कि हमारे वैज्ञानिकों की बौद्धिक क्षमता अतुलनीय है। अपनी कार्य क्षमता के बल पर वैज्ञानिक किसान कल्याण और विकास का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान अब पूसा में तय नहीं होगा, खेत और किसान के हिसाब से आगे के शोध के रास्ते तय होंगे। उन्होंने आईसीएआर के महानिदेशक को ‘एक टीम-एक लक्ष्य’ की संकल्पना पर भी काम करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि एक केंद्रित लक्ष्य के साथ वैज्ञानिकों की टीम बनाकर, किसान कल्याण के लिए कार्य करें। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, छोटी जोत, वायरस अटैक और पशुपालन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों के बावजूद उत्पादन में लगातार वृद्धि की दिशा में वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की और प्राकृतिक खेती के जरिए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि दलहन और तिलहन में प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाने और बड़े पैमाने पर शोध करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जोत के आकार छोटे हैं, इसलिए बड़ी मशीनों की जरूरत नहीं। छोटी मशीनें बनाने पर जोर देना होगा। जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों की सेल्फ लाइफ बढ़ाने की दिशा में शोध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समझौता ज्ञापन करते समय ध्यान दिया जाये कि जिन कंपनियों के साथ समझौते हो रहे हैं वे किस कीमत पर बीज और उत्पाद बेच रही हैं इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए अन्यथा वैज्ञानिकों के शोध का लाभ किसानों को नहीं मिल पायेगा। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों की शिकायतों के लिए आधिकारिक तौर पर एक टोल फ्री नंबर जारी किया जायेगा। मानक से कमतर उर्वरक या बीज कोई उनके साथ धोखा करता है तो किसान इस नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि 30 हजार बायोस्टिमुलेंट बेचे जा रहे थे जिसके संबंध में सख्ती से कदम उठाया गया है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखकर इस संबंध में उचित कार्रवाई के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान को गैर-उपयोगी उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार से जन औषधि केंद्रों के रूप में सस्ती दवाइयों की दुकान हैं, उसी तर्ज पर सस्ते उर्वरकों के लिए भी केंद्र या दुकान खोलने पर विचार किया जा सकता है।
श्री चौहान ने कहा, “ देश में अन्न के भंडार भरे हुए हैं। हम गेहूं का निर्यात कर रहे हैं। चावल उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज कैबिनेट की बैठक में चावल के स्टोरेज को लेकर चर्चा की गयी। चावल का इतना उत्पादन हुआ है कि रखने के लिए अतिरिक्त जगह का प्रबंध किया जा रहा है। पिछले 11 साल में खाद्यान्न उत्पादन में ढाई से तीन गुना वृद्धि देखी गई। इसी तरह बागवानी के क्षेत्र में साल 2014 से 2025 के बीच एक करोड़ दो लाख टन प्रति वर्ष की वृद्धि दर्ज की गयी। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित देश भर से आये भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक, अन्य वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुये।
