नयी दिल्ली 05 जून (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्यात योग्य कृषि यंत्र बनाने का आह्वान करते हुए कहा है कि उद्योगों को दुनिया को कृषि यंत्र निर्यात करने की दिशा में भी काम करना चाहिए और इसके लिए राज्य सरकारों को भी मिलकर काम करना होगा।
श्री चौहान ने गुरुवार को पंजाब के पटियाला में कृषि यंत्रों के कारखाने का निरीक्षण करने के बाद कहा कि हमें विदेशों की आवश्यकता के अनुसार निर्यात के लिए कृषि यंत्र बनाने चाहिए और साथ ही अपने देश के छोटी जोत वाले किसानों के लिए भी कृषि यंत्र बनाने पर जोर देना होगा। इन यंत्रों की कीमत भी ऐसी होनी चाहिए, जिसे हमारे किसान बिना आर्थिक दबाव के खरीद सकें।
श्री चौहान ने कहा कि भविष्य में कृषि के मशीनीकरण को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उद्योग जगत से भी मिलकर इसे नयी दिशा देने का काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्पर्धा करने लायक कृषि यंत्रों का अब हमारे देश में निर्माण हो रहा है। खेती की हर समस्या का समाधान किसान भाइयों-बहनों से बातचीत के बाद ही तय किया जाएगा, ताकि भारत आगे बढ़ सके और हम दुनिया को दिशा दिखा सके। इस अवसर पर पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां भी थे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। वर्तमान में चौथी तिमाही में देश ने 7.5 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है, जिसमें 5.4 प्रतिशत योगदान कृषि क्षेत्र का है। अर्थव्यवस्था में 18 प्रतिशत से ज्यादा कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी है। देश की लगभग 50 फीसदी आबादी की आजीविका का स्रोत्र कृषि ही है।
श्री चौहान ने कहा कि कृषि के परिदृश्य को बदलना है तो ठोस कदम उठाने होंगे। समस्याओं का समाधान निकलना चाहिए। हमारे नवाचारों से निर्मित मशीनें आज देश के साथ-साथ विदेशों के लिए भी कारगर सिद्ध हो रही है।
