मुंबई, 31 मई (वार्ता) महाराष्ट्र में पुणे की एक अदालत ने शनिवार को हिन्दुत्ववादी नेता विनायक दामाेदर सावरकर के खिलाफ दायर मानहानि के मामले में उनके पोते सत्यकी सावरकर के मातृवंश की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग करने वाली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की याचिका शनिवार को खारिज कर दी।
न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) अमोल शिंदे ने यह फैसला सुनाया।
अदालत के मुताबिक यह मामला लंदन में एक भाषण के दौरान श्री गांधी की कथित मानहानि वाली टिप्पणियों से संबंधित है, न कि श्री सत्यकी सावरकर की दिवंगत मां हिमानी अशोक सावरकर वंशावली से यह ताल्लुक रखता है।
अदालत ने श्री गांधी के अनुरोध में कोई तथ्यात्मक गुणवत्ता नहीं पायी और कहा कि शिकायतकर्ता की मातृवंश की जानकारी अदालती कार्रवाई के लिए अप्रासंगिक है। इसके लिए किसी तरह की जांच जरूरी नहीं है। कांग्रेस नेता की ओर से पेश वकील मिलिंद पवार ने तर्क दिया कि बचाव के लिए शिकायतकर्ता की मातृवंश की जानकारी आवश्यक है, क्योंकि इस बाबत केवल पैतृक विवरण ही प्रदान किया गया है।
अदालत ने हालांकि इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। एक अन्य पहलू पर न्यायालय ने सुनवाई करते हुये श्री गांधी की जमानत रद्द करने की श्री सत्यकी सावरकर की याचिका को भी यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसके लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं।
न्यायाधीश ने कहा कि श्री गांधी को व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट के साथ जमानत मंजूर की गयी थी। उन्हें इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि वह जानबूझकर कार्रवाई में देरी कर रहे हैं।
सत्यकी सावरकर की मानहानि संबधी शिकायत लंदन में श्री गांधी के मार्च 2023 के भाषण से ताल्लुक रखती है, जिसमें कांग्रेस नेता ने कथित तौर पर दावा किया था कि विनायक दामोदर सावरकर ने एक मुस्लिम व्यक्ति को पीटने और उस पर खुशी जाहिर करने के बारे में लिखा था। शिकायतकर्ता ने ऐसे दावों का खंडन करते हुए श्री गांधी की टिप्पणियों को “काल्पनिक, झूठा और दुर्भावनापूर्ण” करार दिया है।
