कोलकाता (वार्ता) पश्चिम बंगाल पुलिस ने गुरुवार को कोलकाता के न्यू टाउन में प्रदेश शिक्षा विभाग के मुख्यालय विकास भवन के समीप आंदोलनरत बर्खास्त शिक्षकों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।
हजारों बर्खास्त शिक्षकों ने आज दोपहर से विकास भवन की घेराबंदी कर रखी थी और सरकारी कर्मचारियों को बाहर आने से रोक दिया। पुलिस ने इलाके को खाली करने के कई अनुरोध को अनुसना कर दिये जाने के बाद लाठीचार्ज किया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब पुलिस ने बाहर निकलने का रास्ता साफ करना चाहा तो ईंटों और अन्य मिसाइलों से हमला किया गया, जिसके बाद लाठीचार्ज किया गया। पुलिस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए जिन्हें पास के अस्पतालों में ले जाया गया।
एक प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई में 50 से अधिक बर्खास्त शिक्षक घायल हो गए।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कथित पुलिस ज्यादती की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “कक्षाओं से लेकर दमन तक। क्या बंगाल में आवाज़ उठाने की यही कीमत है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे शिक्षकों पर लाठीचार्ज किया , जिससे विकास भवन युद्ध के मैदान में बदल गया। उन्होंने दावा किया कि एक महिला के पैर में फ्रैक्चर हो गया, जबकि दूसरी के सिर से खून बह रहा था , फिर भी पुलिस की क्रूरता जारी रही। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा “क्या यह ममता बनर्जी के अधीन लोकतंत्र है या तानाशाही।”
गौरतलब है कि शिक्षकों को कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद बर्खास्त कर दिया गया था और शीर्ष न्यायालय ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था। न्यायालय ने कथित नकद नौकरी घोटाले के बाद सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लगभग 26,000 शिक्षकों को प्रभावित करने वाली 2016 की पूरी पैनल भर्ती को रद्द कर दिया, जिसके लिए तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया गया था और वे न्यायिक हिरासत में हैं। शीर्ष अदालत ने सरकार को 31 दिसंबर, 2025 तक सभी योग्य शिक्षकों को स्कूल चलाने के लिए रखने और साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी है।
