सिंगरौली:समर्थन मूल्य के तहत समितियों में खरीदी की जाने वाली धान के परिहवन से लेकर गोदाम तक में हेरीफेरी हुई है। सूत्र बताते है कि परिवहन के वक्त गोदाम मे धर्मकाटा तौल में प्रति ट्रक में तीन क्विंटल से चार क्विंटल तक वजन कम मिला है। वजन की यह कमी गोदाम से हुई है। जहां समितियों में धान की मात्रा कम पाई गई है। जिसमे सेवा सहकारी समिति महुआगॉव 346 क्विंटल, झारा 356 क्विंटल, माड़ा 782 क्विंटल, कोयलखूथ 199 क्विंटल, घोघरा कुशाही 201 क्विंटल, कर्सुआराजा 138 क्विंटल, कर्सुआराजा क्रमांक 2-180, बरहट 126 क्विंटल, खुटार 122 क्विंटल सहित सहुआर,बैढ़न, बिंदुल, निवास, जमगढ़ी, घोघरा, मकरोहर, गढ़वा, खम्हारडीह, चितरंगी, तियरा, उर्ती, मझौली शामिल है जहां समितियों में धान की मात्रा खरीदी से कम पाई गई है।
इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित सीधी ने उपायुक्त सहकारिता को पत्र लिखकर संबंधित उपार्जन केन्द्र प्रभारियों से शार्टेज मात्रा की राशि जमा कराने के लिए निर्देशित किया है और यह भी कहा है कि यदि संबंधित केन्द्र प्रभारियों के द्वारा शार्टेज मात्रा धान की राशि जमा नही कराते है तो उनके विरूद्ध जॉच कर एफआईआर दर्ज करायें। सीईओ जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के उक्त निर्देश के बाद अभी किसी भी केन्द्र प्रभारी के विरूद्ध एफआईआर दर्ज नही की गई है। क्योंकि समितियों के पास खुद का धर्मकाटा नही है, और प्राईवेट धर्मकाटा के नाप-तौल को गोदाम प्रभारी मानते नही है।
गोदाम में उनका खुद का काटा है।इधर,अनुबंधित परिवहनकर्ता का निर्देश था कि 72 घण्टे में खरीदी केन्द्रो से धान का परिवहन करें। किंतु जिले में 20 से 25 दिनों बाद खरीदी केन्द्रो से धान का परिवहन शुरू किया गया था। खरीदी केन्द्र प्रभारी बताते है कि खुले में 20 से 25 दिन धान पड़ी रह गई, तो उसका सूखना लाजमी है, लेकिन इसे मानने के लिए कोई तैयार नही है और ना ही परिवहनकर्ता पर जबावदेही थोपी जा रही हैं। ऐसे में शार्टेज धान की मात्रा सभी जबावदेही खरीदी केन्द्र प्रभारियों पर थोपने से सीईओ जिला सहकारी केन्द्रीय बैक सीधी भी सवालो के कटघर्रे में घिरते नजर आ रहे है।
