हाईकोर्ट ने उक्त दिशा-निर्देश के साथ ही अपीलकर्ता के हक में अंतरिम राहत देते हुए आगामी आदेश तक दुकानों के संबंध में यथास्थिति बरकरार रखने की व्यवस्था दे दी है। इस मामले की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता सिवनी निवासी नंदराम, अभिषेक लखेरा, उमाशंकर लखेरा, जगदीश की ओर से अधिवक्ता ओमशंकर विनय पांडे व अंचन पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अपीलकर्ता जिस भूमि पर दो दशक से अधिक अवधि से चूड़ी-बिंदी की दुकान लगाते थे, वहां कृषि उपज मंडी ने दुकान बनाने का प्रस्ताव रखा।
वादा किया गया कि यहां से हटाने पर पक्की दुकानें बनाकर पहले से व्यापार करने वाले अपीलकर्ताओं सहित अन्य को वरीयता आधार पर आवंटन किया जाएगा। इसके लिए अमानत राशि जमा करनी होगी। अपीलकर्ताओं ने राशि जमा कर दी। लेकिन बाद में जिला प्रशासन व मंडी प्रशासन ने मिलजुलकर दुकानों को मनमाने तरीके से आवंटित करने का तरीका अपना लिया। पूछताछ करने पर नीलामी प्रक्रिया की कहानी रची गई। इसके नाम पर अपीलकर्ताओं की जमा राशि हड़प ली गई। यहां तक की पूर्व में याचिका पर स्थगन तक का उल्लंघन करते हुए बेदखली जैसा अनुचित कदम उठाया गया। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये