ढांचागत विकास में नये आयाम स्थापित कर रहा है देश: मुर्मू

नयी दिल्ली, 31 जनवरी (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि देश में आधुनिक ढांचागत विकास को नयी गति मिल रही है और इससे न सिर्फ नागरिकों के जीवन में सुधार हो रहा है बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है तथा दुनिया में भारत की छवि और मजबूत हो रही है।

श्रीमती मुर्मू ने शुक्रवार को संसद के दोनों को सदनों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार विकसित भारत के निर्माण के लिए ढांचागत विकास को महत्व दे रही है और सड़क, रेल, बंदरगाह को आधुनिक रूप से विकसित करने के साथ ही मेट्रो रेल तथा हवाई मार्ग पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे विकसित भारत की यात्रा को नयी ऊर्जा मिल रही है, जिससे जनभागीदारी सामूहिक सामर्थ्य का कारण बन रही है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक ढांचागत विकास से नागरिकों को एक बेहतर जीवन एवं देश को नई पहचान मिलने के साथ ही देश के लोगों में नया आत्मविश्वास भी पैदा हो रहा है। देश ने बीते दशक में विश्व स्तरीय ढांचागत व्यवस्था के निर्माण के कई मील के पत्थर तय किए हैं। इससे दुनिया में भारत की छवि मजबूत हुई है और निवेशकों का भारत के प्रति भरोसा बढ़ा है, उद्योगों को बल मिला है और नए रोजगार का निर्माण हो रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा, “सरकार देश के हर हिस्से को हाइवे, एक्सप्रेसवे से कनेक्ट करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान द्वारा परियोजनाओं को पूरा करने की गति तेज हुई है। दस साल पहले, बुनियादी ढांचे का बजट लगभग दो लाख करोड़ रुपये था जो पिछले बजट में बढ़कर 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।

पिछले एक दशक के काम को आगे ले जाते हुए गत छह महीनों में सरकार ने भविष्य के लिए ढांचागत विकास में रिकॉर्ड निवेश किया है।”

उन्होंने कहा, “ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना पूरी हो गई है और अब देश कश्मीर से कन्याकुमारी तक रेलवे लाइन से जुड़ जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चेनाब ब्रिज का निर्माण हुआ है जो विश्व का सबसे ऊँचा रेल ब्रिज है। साथ ही आँजी ब्रिज, देश का पहला रेल केबल ब्रिज बना है। शिंकुन ला सुरंग पर काम भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। निकट भविष्य में पूरी होने पर ये विश्व की सबसे ऊँची सुरंग होगी। इससे लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के बीच बारहमासी संपर्क बना रहेगा।”

श्रीमती मुर्मू ने सड़क और रेल मार्ग के विकास के साथ ही बंदरगाह और हवाई मार्ग का भी जिक्र किया और कहा “वाढवण में भारत के पहले डीप वाटर मेगा पोर्ट की आधारशिला रखी गई है। छिहत्तर हज़ार करोड़ की लागत से बनने वाला ये पोर्ट विश्व के शीर्ष दस पोर्ट्स में से एक होगा। भारत का नागरिक उड्यन क्षेत्र में भी तेज़ी से विकास कर रहा है। देश की एयरलाइन कम्पनियों ने 1700 से अधिक नए विमानों के ऑर्डर दिए हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले विमानों के परिचालन के लिए हम एयरपोर्ट्स का विस्तार कर रहे हैं। पिछले एक दशक में देश में एयरपोर्ट्स की संख्या दोगुनी हो गई है।”

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