आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के विरोध में हड़ताल

इंदौर: केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र में कार्यरत आईडीबीआई बैंक को कनाडा की एक निजी कंपनी के साथ 52878 करोड़ में प्रभावी नियंत्रण की डील को स्वीकृति देने के विरोध में आईडीबीआई बैंक के बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने 2 और 3 नवंबर को दो दिवसीय बैंक हड़ताल की है. हड़ताल के कारण आज पूरे देश में आईडीबीआई बैंक में कमकाज ठप्प रहा.

बैंककर्मी संगठनों के यूनाइटेड फोरम के आह्वान पर सोमवार को देश आठ लाख बैंककर्मियों ने इस हड़ताल के समर्थन में सभी नगरों में प्रदर्शन किए.इंदौर महानगर के बैंककर्मियों द्वारा रतलाम कोठी क्षेत्र में स्थित आईडीबीआई बैंक के शाखा परिसर में एकत्रित हो कर प्रभावी प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में सार्वजनिक क्षेत्र तथा निजी क्षेत्र की सभी बैंकों के बैंककर्मी शामिल हुए. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में उपस्थित महिला बैंककर्मियों ने जोशीले नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए फोरम के संयोजक मोहनकृष्ण शुक्ला ने कहा कि जिस बैंक के पुनरुत्थान में केंद्र सरकार ने 25000 करोड़ रुपए और सार्वजनिक क्षेत्र की जल आईसी ने रूप.21654 करोड़ निवेश किए हों और जिस बैंक ने वर्ष 2025-26 में रु.9513 करोड़ का लाभ कमाया हो उस आईडीबीआई बैंक को मात्र रु.52878 करोड़ में किसी विदेशी कंपनी के हाथों सौंप देना शंका पैदा करता है.

इसकी निष्पक्ष जाँच की जाना चाहिए, और सेवारत बैंककर्मियों की सेवाशर्तों की सुरक्षा की जाना चाहिए. प्रदर्शन का नेतृत्व सर्वश्री नवीन मोदी, ऋचा गांधी, सोनल अग्रवाल, यूएस वर्मा, राजेश जैन, जी.गढवे, अभिषेक चौबे आदि ने किया. कार्यक्रम का संचालन बैंक आफ महाराष्ट्र के रामदेव सायडीवाल ने किया. धन्यवाद आईडीबीआई बैंक के अभिषेक श्रीवास और विकास भदौरिया ने दिया.

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