• सहयोग का केंद्र-बिंदु स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकियों को व्यावहारिक बैंकिंग अनुप्रयोगों में रूपांतरित करना होगा
• प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में क्वांटम-सुरक्षित (क्वांटम-सेफ़) सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर, क्वांटम-जनित यादृच्छिकता (रैंडमनेस) तथा उन्नत इष्टतमीकरण (ऑप्टिमाइज़ेशन) सम्मिलित हैं
• समझौता ज्ञापन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा एवं अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग हेतु रूपरेखा भी प्रदान करता है
• भविष्योन्मुखी बैंकिंग के समर्थन हेतु संयुक्त अनुसंधान, अवधारणा-प्रमाण (प्रूफ़ ऑफ़ कॉन्सेप्ट – पीओसी), प्रौद्योगिकी प्रदर्शन एवं क्षमता निर्माण
• यह साझेदारी बैंक ऑफ़ इंडिया की बैंकिंग विशेषज्ञता एवं व्यापक परिचालन स्तर को सी-डैक की उन्नत संगणन तथा स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास संबंधी क्षमताओं को एक साथ एक मंच पर लाती है
नई दिल्ली, 29 अक्तूबर, 2026: बैंक ऑफ़ इंडिया (बीओआई) तथा भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) के अधीन एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था, सी-डैक ने आज बैंकिंग क्षेत्र में क्वांटम वित्तीय नवोन्मेष एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के अंगीकरण पर सहयोग हेतु एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता ज्ञापन बैंक ऑफ़ इंडिया एवं सी-डैक द्वारा बैंकिंग तथा वित्तीय सेवा क्षेत्र के लिए रणनीतिक महत्व की प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान, विकास, पायलट कार्यान्वयन, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन एवं क्षमता निर्माण संबंधी पहलों के अन्वेषण हेतु एक रूपरेखा स्थापित करता है।
यह सहयोग बैंक ऑफ़ इंडिया की बैंकिंग क्षेत्र संबंधी विशेषज्ञता, देशव्यापी उपस्थिति तथा उच्च लेन-देन मात्रा वाले प्रौद्योगिकी परिवेश को सी-डैक की उच्च निष्पादन संगणन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकियों, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा एवं स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास संबंधी क्षमताओं को एक साथ एक मंच पर लाता है।
इस साझेदारी का एक प्रमुख केंद्र-बिंदु वित्तीय नवोन्मेष हेतु क्वांटम पारितंत्र का विकास होगा, जिसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणालियों को क्वांटम प्रौद्योगिकियों से संबद्ध अवसरों के साथ-साथ उभरती सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार करना है। दोनों संस्थाएँ संयुक्त रूप से क्वांटम-प्रेरित एवं क्वांटम-सुरक्षित प्रौद्योगिकियों का अन्वेषण करेंगी, जो बैंकिंग में सुरक्षा, विश्वास, सुदृढ़ता एवं निर्णय-प्रक्रिया को और अधिक सशक्त बना सकें।
इस सहयोग के अंतर्गत बैंकिंग के लिए उपयोगी –मामलों के प्राथमिकता-आधारित पोर्टफ़ोलियो की पहचान करने, सुरक्षित सैंडबॉक्स परिवेश में अवधारणा-प्रमाण (पीओसी) का प्रदर्शन करने, तकनीकी व्यवहार्यता एवं संभावित बैंकिंग मूल्य का आकलन करने, विद्यमान प्रणालियों के सापेक्ष उभरती पद्धतियों का तुलनात्मक मूल्यांकन करने तथा आगे के विकास, प्रायोगिक कार्यान्वयन (पायलट) अथवा अंगीकरण के लिए रोडमैप तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
इस सहयोग पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बीओआई के कार्यपालक निदेशक श्री राजीव मिश्रा ने कहा, “क्वांटम प्रौद्योगिकियों में साइबर सुरक्षा से लेकर जटिल वित्तीय निर्णय-प्रक्रिया तक, बैंकिंग के अनेक पहलुओं को नया स्वरूप प्रदान करने की क्षमता है। सी-डैक के साथ इस सहयोग के माध्यम से हमारा लक्ष्य इन उभरती संभावनाओं का संरचित ढंग से अन्वेषण एवं मूल्यांकन करना तथा बैंक ऑफ़ इंडिया को प्रौद्योगिकी की अगली पीढ़ी के लिए तैयार करने हेतु आवश्यक ज्ञान एवं क्षमताओं का निर्माण करना है।”
मेइटी के सचिव श्री एस. कृष्णन, भा.प्र.से. ने प्रौद्योगिकीय प्रगति में योगदान के लिए बैंक ऑफ़ इंडिया को बधाई दी तथा स्वदेशी नवोन्मेष को बढ़ावा देने हेतु सी-डैक के साथ बैंक के सहयोग की सराहना की। उन्होंने साइबर सुरक्षा संबंधी बढ़ती चिंताओं एवं उभरते प्रौद्योगिकीय खतरों के वर्तमान परिदृश्य में क्वांटम-सुदृढ़ वित्तीय पारितंत्र के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे बैंकिंग क्षेत्र को क्वांटम युग की चुनौतियों एवं अवसरों के लिए तैयार किया जा सके।
समझौता ज्ञापन पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सी-डैक के महानिदेशक श्री ई. मगेश ने कहा, “बैंक ऑफ़ इंडिया के साथ यह सहयोग भारत की स्वदेशी क्वांटम एवं उभरती प्रौद्योगिकी क्षमताओं को व्यावहारिक बैंकिंग समाधानों में रूपांतरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संयुक्त अनुसंधान एवं विकास तथा क्षमता निर्माण के माध्यम से सी-डैक का लक्ष्य एक सुरक्षित, सुदृढ़ एवं भविष्योन्मुखी वित्तीय पारितंत्र के निर्माण में योगदान देना है।”
क्वांटम प्रौद्योगिकियों के अतिरिक्त, यह समझौता ज्ञापन ब्लॉकचेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा वित्तीय सेवाओं से संबंधित अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग हेतु रूपरेखा भी प्रदान करता है। संभावित क्षेत्रों में इंटेलिजेंट दस्तावेज़ प्रसंस्करण, ग्राहक एवं कर्मचारी सहायता, धोखाधड़ी विश्लेषण, ऋण एवं वित्तीय विश्लेषिकी, सुरक्षित एआई प्लेटफ़ॉर्म, उत्तरदायी एआई, स्मार्ट अनुबंध (स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट), डिजिटल पहचान, सुरक्षित डेटा साझाकरण तथा बैंकिंग से संबंधित अन्य अनुप्रयोग सम्मिलित हैं।
यह साझेदारी क्वांटम संगणन, क्वांटम सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन तथा अन्य उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से एक भविष्योन्मुखी प्रतिभा पारितंत्र विकसित करने पर भी केंद्रित होगी।
समझौता ज्ञापन का औपचारिक आदान-प्रदान सी-डैक मुंबई के कार्यकारी निदेशक श्री आदित्य कुमार सिन्हा तथा बैंक ऑफ़ इंडिया के मुख्य महाप्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) एवं मुख्य सूचना अधिकारी (सीआईओ) श्री सत्येन्द्र सिंह द्वारा मेइटी के सचिव श्री एस. कृष्णन, भा.प्र.से.; बैंक ऑफ़ इंडिया के कार्यपालक निदेशक श्री राजीव मिश्रा; मेइटी के संयुक्त सचिव श्री सुदीप श्रीवास्तव तथा सी-डैक के महानिदेशक श्री ई. मगेश की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर मेइटी, बैंक ऑफ़ इंडिया एवं सी-डैक के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
इस सहयोग के माध्यम से बैंक ऑफ़ इंडिया एवं सी-डैक मुंबई का लक्ष्य स्वदेशी अनुसंधान एवं उभरती प्रौद्योगिकियों को व्यावहारिक बैंकिंग अनुप्रयोगों में रूपांतरित करने हेतु एक संरचित मार्ग तैयार करना तथा एक सुरक्षित, सुदृढ़ एवं प्रौद्योगिकीय दृष्टि से भविष्योन्मुखी वित्तीय पारितंत्र के निर्माण में योगदान देना है।
