तेहरान, 24 अक्टूबर (वार्ता) ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजरायल आने वाले दिनों में ईरान पर हमले दोबारा शुरू करते हैं तो ईरानी सुरक्षा बल फारस की खाड़ी में बिछे इंटरनेट के तारों को निशाना बना सकते हैं। टाइम्स ऑफ इजरायल की एक रिपोर्ट में शनिवार को ईरानी सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से यह दावा किया गया।
रिपोर्ट में दो ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि अगर अमेरिका के साथ बातचीत का सिलसिला टूटता है तो ईरान समंदर के अंदर मौजूद तारों को निशाना बना सकता है। ऐसी स्थिति में ईरान इन तारों को ठीक करने की कोशिशों को भी नाकाम करेगा, जिससे संचार और इंटरनेट सेवाएं लंबे वक्त तक प्रभावित रह सकती हैं।
रिपोर्ट में अधिकारी के हवाले से कहा गया, “अगर ईरान पर हमला होता है तो हम कोई भी सीमा नहीं रखेंगे। समुद्र तल में मौजूद तारों से लेकर सैन्य ठिकानों तक हमला करेंगे, अमेरिका को आग से नहीं खेलना चाहिए।”
उल्लेखनीय है कि ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के राजनीतिक मामलों के उपाध्यक्ष यदोल्ला जवानी ने बुधवार को कहा था कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया जाता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़र रहे सात प्रमुख तारों को निशाना बनाया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के अनुसार, दुनिया भर का लगभग 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी केबलों के ज़रिए आता-जाता है। दूरसंचार अनुसंधान कंपनी ‘टेलीज्योग्राफी’ के अनुसंधान निदेशक एलन मौल्डिन का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में होने वाले हमलों का वैश्विक असर सीमित हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा इस जलमार्ग से होकर गुज़रता है। यह जलमार्ग ईरान और ओमान को अलग करता है और खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा अरब सागर से जोड़ता है।
रिपोर्ट में ईरान के दूसरे सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा गया कि समुद्र के नीचे बिछी तारों को होने वाले किसी भी नुकसान के लिए खाड़ी देशों को अमेरिका को जिम्मेदार ठहराना चाहिए, क्योंकि इन क्षेत्रीय देशों ने डिजिटल बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया है।
कई केबल कटने से इंटरनेट सेवाएं धीमी हो सकती हैं और वित्तीय लेनदेन, ई-कॉमर्स तथा क्लाउड कंप्यूटिंग में बाधा आ सकती है। श्री मौल्डिन ने कहा कि इस रुकावट का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या दूरसंचार कंपनियां ट्रैफिक को दूसरे कनेक्शनों के जरिए भेज पाती हैं और क्या उन नेटवर्क में पर्याप्त अतिरिक्त क्षमता मौजूद है।
संघर्ष के दौरान मरम्मत का काम मुश्किल हो सकता है। बीमा की अधिक लागत और क्षेत्रीय जल क्षेत्र में प्रवेश के लिए परमिट मिलने में देरी जैसी बातें चुनौतियों को और बढ़ा देती हैं। लाल सागर एक बड़ा निशाना बन सकता है, खासकर तब जब ईरान को यमन में अपने सहयोगी हूतियों का समर्थन मिले। ईरान ने सार्वजनिक रूप से वहां मौजूद केबलों पर हमला करने की कोई योजना नहीं बताई है।
श्री मौल्डिन के अनुसार, यह जलमार्ग यूरोप, पूर्वी अफ्रीका और एशिया के बीच डेटा ले जाता है। वैश्विक अंतरराष्ट्रीय मांग का लगभग तीन प्रतिशत और इन क्षेत्रों के बीच होने वाले ट्रैफिक का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ये खतरे ऐसे समय में सामने आए हैं जब खाड़ी देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को तेल पर निर्भरता से निकालकर उनमें विविधता लाने के लिए अपने प्रौद्योगिकी क्षेत्र का विस्तार कर रहे हैं। साथ ही, ये देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब के रूप में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं और अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ अपने संबंध भी मजबूत कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि ईरान ने मार्च में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अमेज़न वेब सेवाओं के दो ठिकानों को निशाना बनाया और बहरीन में एक अन्य इकाई के पास के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। उस महीने संघर्ष के चरम पर, आईआरजीसी ने माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एप्पल और एनवीडिया जैसी अमेरिकी टेक कंपनियों को भी वैध लक्ष्य माना।
ज़मीनी नेटवर्क इंटरनेट ट्रैफ़िक के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध करा सकते हैं। खाड़ी देशों की सरकारें और अमेरिकी टेक कंपनियां प्रणाली की मज़बूती बढ़ाने के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचे में निवेश कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट की योजना 2030 तक पूरे क्षेत्र में समुद्र के नीचे और ज़मीनी संपर्क के लिए 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा का निवेश करने की है।
