
नई दिल्ली, कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान राजीव वाड्रा की एकल फोटो प्रदर्शनी नो आईडिया इज फाइनल को लेकर विवाद बढ़ गया है. प्रदर्शनी के उद्घाटन से ऐन पहले प्रशासन द्वारा युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों और स्ट्रीट फोटोग्राफी से जुड़ी लगभग सत्तर तस्वीरों को हटाए जाने के बाद यह मामला कला की आजादी बनाम राजनीतिक सेंसरशिप की जंग में तब्दील हो चुका है.
इस घटनाक्रम पर जहां कांग्रेस और गांधी परिवार ने तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है, वहीं बीकानेर हाउस प्रबंधन ने भी आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस कदम को पूरी तरह हास्यास्पद बताते हुए इसे केंद्र सरकार के इशारे पर की गई कार्रवाई करार दिया है.
प्रियंका गांधी वाड्रा ने बेटे के समर्थन में उतरते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि जब सत्ता में बैठा कोई ताकतवर व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो उसे एहसास नहीं होता, लेकिन वह उस ताकत को पहले ही खो चुका होता है जिसे बचाने की वह कोशिश कर रहा होता है. उन्होंने कहा कि रेहान की तस्वीरें केवल शांतिपूर्ण युवा आंदोलनों का एक दृश्य दस्तावेज थीं, जिनमें कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं थी. रेहान के पिता रॉबर्ट वाड्रा ने भी प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि कला को इस तरह राजनीतिक चश्मे से देखना और अंतिम समय में दबाव बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसे सेंसरशिप का अगला स्तर बताते हुए सवाल उठाया कि अगर देश का युवा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहा है और देश का तिरंगा लहरा रहा है, तो उन तस्वीरों को आपत्तिजनक या राजनीतिक बताकर हटाना किस मानसिकता को दर्शाता है. वहीं कलाकार रेहान वाड्रा ने साफ किया कि उनसे कहा गया था कि यदि तस्वीरें नहीं हटाई गईं तो पूरी प्रदर्शनी रद्द कर दी जाएगी. रेहान ने बताया कि ये तस्वीरें पिछले 6 महीनों के दौरान दिल्ली में हुए आंदोलनों की स्ट्रीट फोटोग्राफी का हिस्सा थीं. इनमें राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की भी दो तस्वीरें थीं, जिन्हें हटाने से उन्होंने साफ मना कर दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कला पर किसी भी तरह की तानाशाही स्वीकार नहीं करेंगे और इन तस्वीरों को प्रदर्शित करने के लिए दिल्ली में ही कोई दूसरा वेन्यू तलाशेंगे.
हालांकि राजनीतिक विवाद बढ़ने के बाद बीकानेर हाउस मैनेजमेंट सोसायटी ने एक वक्तव्य जारी कर राजनीतिक सेंसरशिप के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. प्रबंधन ने अपनी सफाई में तर्क दिया है कि रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी का एक बड़ा हिस्सा वन्यजीव और सांस्कृतिक श्रेणियों पर केंद्रित नहीं था, बल्कि उनमें ऐसी तस्वीरें शामिल थीं जो तय की गई गाइडलाइंस और नीति के अनुरूप नहीं पाई गईं.सोसाइटी ने अपने स्पष्टीकरण में इस बात पर विशेष जोर दिया कि उन्होंने पूरी प्रदर्शनी पर रोक नहीं लगाई है. जो तस्वीरें संस्थान की नीति के दायरे में पाई गईं, उनका प्रदर्शन अभी भी गैलरी में सुचारू रूप से जारी है.
