नई दिल्ली, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सोशल मीडिया पर शिशु आहार (इन्फेंट फूड) और हेल्थ ड्रिंक्स का भ्रामक प्रचार करने वाली दिग्गज एफएमसीजी कंपनियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य नियामक ने नेस्ले इंडिया, एबॉट हेल्थकेयर, न्यूट्रिशिया इंटरनेशनल, मीड जॉनसन न्यूट्रिशन और ‘कॉम्प्लान’ निर्माता जायडस वेलनेस को कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह पूरा विवाद इंस्टाग्राम इन्फ्लूएंसर इरा फातिमा की एक वीडियो रील से शुरू हुआ, जिसमें ‘नैन-प्रो 1’, ‘सिमिलैक’ और ‘एप्टामिल’ जैसे पांच प्रमुख डिब्बाबंद शिशु दूध के ब्रांड्स की सिफारिश की गई थी। एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया कि भारत में शिशु दूध विकल्प (IMS) अधिनियम 1992 के तहत नवजात बच्चों के लिए मां के दूध के विकल्पों का विज्ञापन या ब्रांडिंग करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
नेस्ले के ‘इम्यूनिटी’ दावों और कॉम्प्लान के ‘2X फास्टर ग्रोथ’ विज्ञापन पर उठा सवाल, कंपनियों से मांगे गए वैज्ञानिक सबूत
शिशु आहार के अवैध प्रचार के अलावा FSSAI ने कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर छपे लुभावने और वैज्ञानिक रूप से अप्रमाणित दावों पर भी शिकंजा कसा है। नेस्ले इंडिया के ‘लैक्टोजन प्रो 1’ और ‘नैन एक्सेला प्रो’ पर ‘5 HMOs’ और ‘इम्यूनिटी बढ़ाने’ जैसे दावों को लेकर सवाल उठाए गए हैं और कंपनी से ठोस वैज्ञानिक प्रमाण मांगे गए हैं। वहीं दूसरी तरफ, जायडस वेलनेस के मशहूर ड्रिंक ‘कॉम्प्लान’ पर छपे “2X फास्टर ग्रोथ” (दोगुना तेज विकास) और “याददाश्त बढ़ाने” वाले विज्ञापनों को एफएसएसएआई ने उपभोक्ता नियमों के खिलाफ पाया है।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत होगी सख्त कानूनी कार्रवाई, बच्चों की सेहत से खिलवाड़ पर FSSAI सख्त
नियामक ने नोटिस जारी कर सभी संबंधित कंपनियों और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर से तय समयसीमा के भीतर जवाब तलब किया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों ने FSSAI के इस सख्त कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि नवजात शिशुओं के पोषण के लिए केवल मां का दूध ही सर्वश्रेष्ठ है और इस तरह के भ्रामक विज्ञापनों से अभिभावकों को गुमराह करने पर पूर्ण विराम लगना बेहद जरूरी है।

