सिंगरौली: विंध्यनगर-शक्तिनगर-तेलगवां मार्ग पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा और रात के समय पसरा अंधेरा राहगीरों के लिए खतरा बनता जा रहा है। सड़क पर कहीं मवेशी बैठे नजर आते हैं, तो कहीं भारी वाहनों की आवाजाही के बीच उन्हें बचाकर निकलना वाहन चालकों की मजबूरी बन जाती है। ऐसे में दुर्घटनाओं की आशंका के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होना एनटीपीसी प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
इस मार्ग पर राखड़ से भरे भारी वाहनों का लगातार आवागमन होता है। इसके बावजूद सड़क पर बैठे मवेशियों को हटाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था प्रभावी नजर नहीं आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बताया जाता है कि एनटीपीसी प्रबंधन ने इस कार्य के लिए समितियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इसके बाद भी सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा बना रहना संबंधित समितियों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय स्तर पर समितियों के कामकाज, जिम्मेदारों की निगरानी और कार्यों में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि किन समितियों को जिम्मेदारी दी गई है, उनके कार्यों की निगरानी कौन करता है और निर्धारित दायित्वों का पालन नहीं होने पर क्या कार्रवाई की जाती है।
समस्या को और गंभीर बना रही हैं सड़क किनारे लगे विद्युत खंभों पर बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें। रात के अंधेरे में सड़क पर बैठे मवेशी समय रहते दिखाई नहीं देते। अचानक सामने आने वाले पशुओं को बचाने के प्रयास में दोपहिया वाहन चालकों के गिरने और भारी वाहनों के अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है। इससे राहगीरों के साथ बेजुबान पशुओं की जान भी जोखिम में पड़ती है।
जनसुरक्षा से जुड़े इस मामले में एनटीपीसी प्रबंधन को तत्काल संबंधित समितियों के कामकाज की समीक्षा करनी चाहिए। सड़क से मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, बंद स्ट्रीट लाइटों को चालू कराने और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है। अब देखना यह है कि प्रबंधन जिम्मेदारी तय कर ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह समस्या यूं ही बनी रहती है।
