अंकारा, 21 अक्टूबर (वार्ता) तुर्की ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को अनुमोदन के लिए संसद में पेश किया है। इससे नाटो के दूसरे सबसे बड़े सैन्य योगदानकर्ता तुर्की के इन दोनों देशों के साथ औपचारिक पारस्परिक रक्षा प्रतिबद्धता की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है।
तीनों देशों ने अगस्त में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होने को सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा। नाटो के अनुच्छेद पांच के समान यह प्रावधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का उल्लेख करता है, जो देशों के व्यक्तिगत और सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता देता है।
समझौते के तहत सदस्य देशों ने एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के लिए खतरों का मुकाबला करने हेतु ‘सभी आवश्यक उपाय’ करने पर सहमति जताई है।
यह समझौता तब लागू होगा, जब इसके अनुमोदन संबंधी दस्तावेज रियाद स्थित सचिवालय में जमा करा दिए जाएंगे। इसकी अवधि अनिश्चितकालीन होगी और पहले 10 वर्षों के दौरान सदस्य देश इससे अलग नहीं हो सकेंगे। पाकिस्तान ने कहा है कि समझौते के तहत ‘सामूहिक प्रतिरोधक उपाय’ पहले से ही लागू हैं, जबकि तुर्की में इसके लिए संसदीय मंजूरी आवश्यक है। पाकिस्तान की कार्यपालिका-आधारित संधि व्यवस्था के तहत संघीय सरकार संघीय विधायी सूची के विषयों से संबंधित समझौतों को मंजूरी दे सकती है। हालांकि, तुर्की के संविधान के अनुसार, किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते के बावजूद विदेश में सैनिकों की तैनाती के लिए संसद की अलग से अनुमति जरूरी है।
तुर्की के राष्ट्रपति के संचार निदेशक बुरहानत्तीन दुरान ने समझौते को संसद में पेश किए जाने को तीनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
श्री दुरान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ” हमारे देशों के बीच विकसित यह रणनीतिक साझेदारी सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने, रक्षा क्षेत्र में संयुक्त क्षमताएं बढ़ाने और क्षेत्र में सुरक्षा एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई है।”
एक अधिकारी के अनुसार, इस गठबंधन में तुर्की का योगदान मुख्य रूप से सैन्य उपकरणों, खुफिया जानकारी साझा करने और हथियार प्रणालियों पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा कि गठबंधन के तहत अब तक किसी अन्य प्रकार की सैन्य तैनाती नहीं हुई है।
यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब की रक्षा में अंकारा की संभावित भूमिका के बारे में पूछे जाने पर तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि यह समझौता ‘आक्रामक समझौता’ नहीं है। उन्होंने कहा कि तुर्की किसी दूसरे देश में अपनी जमीन से हमले करने के लिए सैनिक नहीं भेजेगा।
तुर्की ने सऊदी अरब पर हूती हमलों की निंदा की है, रियाद की सैन्य प्रौद्योगिकी संबंधी जरूरतों को पूरा करने की इच्छा जताई है और लाल सागर में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होने पर सहमति दी है।
समझौते में रक्षा उद्योग के विकास, खुफिया जानकारी साझा करने, रसद सहायता और अभियान स्तर सहित आतंकवाद के सभी रूपों से मुकाबले में सहयोग का भी प्रावधान है। तुर्की के सरकारी प्रसारक टीआरटी हाबेर ने संसद में पेश किए जाने से पहले पहली बार समझौते का पूरा पाठ प्रकाशित किया।
इस गठबंधन का सदस्य नहीं होने के बावजूद मिस्र में भी 26 अक्टूबर को सऊदी अरब को संभावित सैन्य सहायता देने की अनुमति के लिए संसदीय मतदान होने की उम्मीद है।
