खाड़ी देशों की यात्रा के दौरान यहां कतर की राजधानी में पत्रकारों से बात करते हुए श्री मैक्रों ने स्पष्ट किया कि इन प्रदर्शनों में प्रत्यक्ष रूप से किसी बाहरी हस्तक्षेप के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन उन्होंने बाहरी तत्वों पर हिंसा से जुड़ी जानकारियों में हेरफेर करने का आरोप लगाया है।
श्री मैक्रों ने कहा, “मेरी नजर में इन घटनाओं में कोई प्रत्यक्ष विदेशी हस्तक्षेप नहीं है। सूचनाओं के साथ विदेशी स्तर पर जो हेरफेर की जा रही है, उसी के चलते कई विदेशी नेताओं की ओर से ऐसी अस्वीकार्य और बेवकूफाना बयानबाजियां सामने आ रही है।”
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि उनके देश को ऐसे विदेशी नेताओं की कोई जरूरत नहीं है, जो ‘अपने चुनाव अभियानों के लिए फ्रांस की समस्याओं का इस्तेमाल’ कर रहे हों। उन्होंने कहा कि अपने-अपने देशों में जारी चुनाव प्रचार के दौरान कुछ नेताओं ने दंगों से जुड़ी एआई-जनरेटेड फर्जी रिपोर्टों और सामग्रियों को बिना जांचे-परखे आंख बंदकर आगे बढ़ाया है।
उन्होंने किसी भी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान का सीधा इशारा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिनकी रिपब्लिकन पार्टी को नवंबर में महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों का सामना करना है और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तरफ था, जिनके देश में इसी महीने चुनाव होने हैं।
‘आई24न्यूज’ को दिए साक्षात्कार में श्री नेतन्याहू ने दावा किया था कि फ्रांस ‘कट्टरपंथी इस्लाम के आक्रमण’ की चपेट में आ गया है, और फ्रांसीसी नेतृत्व पर इस अशांति से निपटने की तैयारी में विफल रहने का आरोप लगाया था। उन्होंने इस पूरी हिंसा का ठीकरा कट्टरपंथी मुसलमानों पर फोड़ा, जबकि पेरिस सहित फ्रांस के कई शहरों में हो रहे इन प्रदर्शनों में विभिन्न वर्गों के लोग हिस्सा ले रहे हैं।
वहीं श्री ट्रंप ने भी इस हिंसा और अशांति के लिए मुस्लिम आव्रजन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यूरोप ने अपनी सीमाओं को सख्त नहीं किया और इन उपद्रवियों को बाहर नहीं निकाला, तो उसका पतन निश्चित है।
श्री ट्रंप ने कहा था, “अगर यूरोप अपनी सीमाओं को सील नहीं करता और प्रदर्शन करने वाले इन अपराधियों को बाहर नहीं निकालता, तो यूरोप का वजूद खत्म हो जाएगा। जब मैं फ्रांस को देखता हूं, जब आप इटली को देखते हैं- यह जो हर तरफ अशांति और नफरत फैली है, यह किसी स्कूल का मुद्दा नहीं है। यह उन लोगों का नतीजा है जो देश के भीतर आकर उसी देश से नफरत करते हैं।”
विदेशी नेताओं की यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है, जब महंगाई और बढ़ती जीवन लागत के खिलाफ पूरे फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच शनिवार को हाल के वर्षों की सबसे भीषण शहरी हिंसा भड़क उठी।
देश के भीतर भी श्री मैक्रों को विपक्ष के तीखे हमलों का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष ने संकट के इस समय में उनकी पश्चिम एशिया यात्रा और रविवार को राष्ट्र के नाम उनके संबोधन पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रपति के पास स्थिति से निपटने का कोई स्पष्ट खाका नहीं है। फ्रांस लौटने से पहले श्री मैक्रों ने हालांकि जोर देकर कहा कि स्थिति पूरी तरह से उनके नियंत्रण में है।
उन्होंने कहा, “घबराहट या कमजोरी का कोई संकेत नहीं होना चाहिए। मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभा रहा हूं और पूरी मुस्तैदी से अपने पद पर डटा हुआ हूं।”
