तेहरान, 20 अक्टूबर (वार्ता) ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यहां अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से बातचीत के बाद कहा कि ईरान और रूस के संबंध अपने इतिहास के सबसे करीबी दौर से गुजर रहे हैं। इस दौरान दोनों पक्षों ने ईरान से जुड़े युद्ध, क्षेत्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक और परमाणु सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की।
श्री अराघची ने मंगलवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस बैठक को क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर “सामयिक और महत्वपूर्ण चर्चा” करार देते हुए कहा, “हमारे इतिहास में कभी भी ईरान और रूस ने इतने मिलकर काम नहीं किया, जितना कि अब कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “हमने यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक, जिसमें लेबनान, फिलिस्तीन, यूक्रेन और यमन शामिल हैं, हर विषय पर चर्चा की। इसके अलावा, आर्थिक और परमाणु सहयोग के विस्तार पर भी मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया गया।”
दोनों विदेश मंत्रियों के बीच हुई वार्ता के बाद आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में श्री अराघची ने कहा कि ईरान-रूस इस बात पर सहमत हैं कि क्षेत्रीय विवादों का हल सैन्य कार्रवाई से संभव नहीं है, बल्कि इनके लिए कूटनीतिक और राजनीतिक प्रयास ही जरूरी हैं।
श्री अराघची ने कहा, “हमारे संबंध रणनीतिक हैं और दोनों राष्ट्रपतियों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि के लागू होने के बाद हमारे रिश्तों का महत्व और अधिक बढ़ गया है।” उन्होंने बताया कि चर्चा में द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक संबंधों, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग के साथ-साथ फारस की खाड़ी, काकेशस, यूक्रेन और ईरान-अमेरिका वार्ताओं के घटनाक्रम भी शामिल रहे।
श्री अराघची ने वैश्विक तेल नौवहन के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में असुरक्षा के लिए अमेरिका-इजरायल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति ईरान के खिलाफ उनकी सैन्य कार्रवाई का सीधा परिणाम है। उन्होंने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास मौजूद असुरक्षा, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य आक्रामकता का सीधा परिणाम है और यह अलग-अलग रूपों में जारी है।”
उन्होंने क्षेत्र में इजरायल के विस्तारवाद को समाप्त करने का भी आह्वान किया और कहा कि कैस्पियन सागर में जहाजों पर हमलों को लेकर ईरान और रूस की चिंताएं समान हैं। दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान, काबुल और इस्लामाबाद के बीच तनाव तथा आतंकवादी खतरों से निपटने के प्रयासों पर भी चर्चा की।
श्री अराघची ने पश्चिमी देशों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि यूरोप को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के प्रति अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ईरान-रूस, अमेरिका के ‘आक्रामक एकतरफावाद’ का बड़े पैमाने पर मिलकर विरोध करते हैं।
सोमवार को यहां पहुंचे श्री लावरोव ने कहा कि रूस ईरान के साथ अपनी 20 वर्ष की रणनीतिक साझेदारी समझौते के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जो दो अक्टूबर को लागू हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के दौरान चले जाने के बाद रूसी विशेषज्ञ धीरे-धीरे ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र में वापस लौटेंगे।
गत 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के देश के खिलाफ युद्ध शुरू किए जाने के बाद से ईरान की यह श्री लावरोव की पहली यात्रा थी। उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से भी मुलाकात की, जिन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आपसी सम्मान की आवश्यकता के मामले में रूस-ईरान के दृष्टिकोण समान हैं।
श्री लावरोव की तेहरान यात्रा बहरीन में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के विदेश मंत्रियों के साथ हुई वार्ताओं के बाद हुई है, जहां क्षेत्रीय देशों ने रूस से आग्रह किया था कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये नौवहन को बहाल करने में मदद करने और गंभीर बातचीत को बढ़ावा देने के लिए ईरान के साथ अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे।
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