इजरायल ने अमेरिकी पत्रकार और यूरोपीय राजनयिकों पर हुए हमलों के मामले में 10 संदिग्धों को किया गिरफ्तार

शुक्रवार को वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी जैतून की कटाई को कवर कर रहीं ‘वाशिंगटन पोस्ट’ की फोटो पत्रकार हेइडी लेविन पर नकाबपोश इजरायली सेटलरों ने हमला कर दिया, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई। इजरायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शनिवार को उनकी सर्जरी हुई और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है।

इसके एक दिन बाद रामल्लाह के पूर्व में स्थित फिलिस्तीनी ईसाई गांव ‘तैबेह’ के पास सेटलरों ने यूरोपीय राजनयिकों के एक प्रतिनिधिमंडल और फ्रांसीसी मेयर बर्नार्ड बौडॉक्स पर हमला कर दिया। इन घटनाओं की अमेरिका, फ्रांस, बेल्जियम, पोलैंड और कनाडा ने कड़ी निंदा की है।

इजरायली पुलिस ने बताया कि ये गिरफ्तारियां तड़के ऑलिव लीफ नामक एक अभियान के तहत की गईं। इस अभियान में इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी ‘शिन बेट’ और इजरायली सेना का सहयोग लिया गया।

पुलिस ने अपने एक प्रारंभिक बयान में कहा था कि आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और कई वाहन जब्त किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि वे अन्य अपराधों की भी जांच कर रहे हैं, जिनमें किसी फिलिस्तीनी के घर में जबरन घुसना और सेना द्वारा जारी प्रतिबंध आदेशों का उल्लंघन करना शामिल है।

पुलिस ने कहा कि जांच अभी जारी है। पहले आठ गिरफ्तारियों की घोषणा और बाद में 10 लोगों के पकड़े जाने के आंकड़ों में आए इस अंतर के बारे में फिलहाल कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने इस हिंसा की निंदा की और कहा कि पुलिस जांचकर्ता दोषियों की पहचान करने के लिए फोरेंसिक सबूत जुटा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनयिकों के इस दौरे के बारे में इजरायली सेना को पहले से सूचित नहीं किया गया था, जबकि ऐसा समन्वय होने से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती थी।

इजरायली सेना ने भी राजनयिकों पर हुए हमले की निंदा की। सेना के अनुसार प्रारंभिक जांच से पता चला है कि घटना के समय वहां कोई सैनिक मौजूद नहीं था। जांचकर्ता वहां सबूत इकट्ठा करने और गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए पहुंचे थे। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने कहा कि तैबेह में हुआ यह हमला सेटलरों द्वारा की जा रही हिंसा के एक बड़े स्वरूप का हिस्सा है। यह हिंसा फिलिस्तीनी समुदायों के लिए खतरा है और शांति स्थापित करने के प्रयासों को कमजोर करती है। उन्होंने इजरायल से मांग की कि वह दोषियों को जवाबदेह ठहराए और वेस्ट बैंक में राजनयिकों तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ये राजनयिक सेना के साथ पूर्व समन्वय के बिना एक ऐसे संवेदनशील इलाके में चले गए थे, जहां पहले भी टकराव होते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लेविन पर हुए हमले से जुड़ी परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हैं। ये गिरफ्तारियां ऐसे समय में हुई हैं जब कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली सेटलर द्वारा फिलिस्तीनियों के खिलाफ की जा रही हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं बढ़ रही हैं। इजरायली मानवाधिकार समूह ‘यश दिन’ की रिपोर्ट के अनुसार 27 सितंबर से अब तक बसने वालों द्वारा कम से कम 170 हमले किए गए हैं।

मानवाधिकार समूहों ने हालांकि सवाल उठाया है कि क्या बसने वालों द्वारा की गई हिंसा की जांच के बाद वास्तव में कोई कानूनी कार्रवाई (मुकदमा) होती है। ‘यश दिन’ के अनुसार 2005 से 2023 के बीच वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के खिलाफ हुई हिंसा के मामलों में इजरायली पुलिस की जांच में से केवल 3 प्रतिशत मामलों में ही पूरी या आंशिक सजा हो पाई। 80 प्रतिशत से अधिक मामलों को इसलिए बंद कर दिया गया क्योंकि संदिग्धों की पहचान नहीं हो सकी या पर्याप्त सबूत नहीं जुटाए जा सके।

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