
पेटलावद। शहर को सुरक्षित बनाने की बातें तो खूब होती हैं, लेकिन पेटलावद में सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत कुछ और ही है। शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और प्रवेश-निकास मार्गों पर निगरानी के लिए आज भी व्यवस्थित CCTV नेटवर्क नहीं है। श्रद्धांजलि चौक पर जनसहयोग से लगाए गए दो कैमरे भी बंद पड़े हैं।
चार साल में नहीं बना CCTV नेटवर्क:
नगर परिषद की वर्तमान व्यवस्था को करीब चार वर्ष होने के बावजूद शहर में CCTV कैमरों का व्यापक नेटवर्क तैयार नहीं हो सका। चोरी, वाहन चोरी, महिलाओं से छेड़छाड़ और चेन स्नेचिंग जैसी घटनाओं के बाद पुलिस को फुटेज के लिए निजी दुकानों और मकानों पर लगे कैमरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
कहीं कैमरे बंद मिलते हैं तो कहीं रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में फुटेज जुटाने में समय लगता है और कई बार यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि बदमाश किस रास्ते से आए और वारदात के बाद कहां से निकले। इसके बावजूद सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते हैं।
पहले हुई पहल, अब कैमरे बंद:
तत्कालीन टीआई संजय रावत ने जनसहयोग से श्रद्धांजलि चौक पर दो CCTV कैमरे लगवाए थे। इनसे पुलिस को संदिग्धों की पहचान में मदद मिली, लेकिन अब दोनों कैमरे बंद पड़े है।
प्रमुख मार्गों पर निगरानी जरूरी:
पुराने बस स्टैंड, झंडा बाजार, अंबिका चौक, गणपति चौक, गांधी चौक, अस्पताल चौराहे और शहर के प्रवेश-निकास मार्गों पर कैमरे लगाए जाने की जरूरत है। इन्हें पुलिस थाने के कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल फुटेज मिल सके।
सवाल नगर परिषद और जनप्रतिनिधियों से भी है कि करीब चार साल में शहर को व्यवस्थित CCTV नेटवर्क क्यों नहीं मिल पाया? शहर की सुरक्षा के लिए बंद पड़े कैमरे चालू कराने और नए कैमरे लगाने की दिशा में ठोस पहल जरूरी है।
सुरक्षित शहर केवल पुलिस के भरोसे नहीं बनता। जब निगरानी के लिए पर्याप्त कैमरे ही नहीं होंगे, तो बदमाशों की आवाजाही का पता लगाना पुलिस के लिए चुनौती बना रहेगा। इस संबंध में एसडीओपी अनुरक्ति सबनानी से चर्चा की तो उनका कहना है कि मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है मैं दिखावाती हूं।
