वॉशिंगटन, फ्रांस में हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शनों और देशव्यापी नागरिक अशांति को लेकर एक चौकाने वाली अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट सामने आई है। फॉक्स न्यूज डिजिटल की हालिया इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फ्रांस के स्टूडेंट प्रोटेस्ट असल में एक बड़े ‘ग्लोबल कम्युनिस्ट प्रोपेगैंडा नेटवर्क’ का हिस्सा हैं। यह नेटवर्क फ्रांस की सीमाओं से निकलकर अमेरिका, ब्रिटेन, ग्रीस, ब्राजील और भारत जैसे देशों तक फैला हुआ है। रिपोर्ट में कुल 50 ऐसे संगठनों की पहचान की गई है, जिनमें लेबर यूनियन, कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट समूह शामिल हैं, जो शिक्षा से जुड़ी स्थानीय शिकायतों का फायदा उठाकर पूंजीवाद, पुलिसिंग और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक मुद्दों जैसे बड़े वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं।
इंडियन अलायंस पेरिस और विदेशी मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका आई सामने, फ्रांस के विरोध प्रदर्शनों की तुलना भारत से की
रिपोर्ट में फ्रांस में सक्रिय ‘इंडियन अलायंस पेरिस’ नामक संगठन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसने सोशल मीडिया के जरिए फ्रांस के प्रदर्शनों को बढ़ावा दिया और इसकी तुलना भारत में हुए छात्र आंदोलनों से की। इस समूह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर फ्रांस और भारत के युवा प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पोस्ट साझा किए थे। इसके अलावा, न्यूयॉर्क स्थित ‘ब्रेकथ्रू न्यूज’ जैसे मीडिया आउटलेट्स पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन प्रदर्शनों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और पुलिस के साथ टकराव के फुटेज प्रसारित करने के आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी नेतृत्व ने भी इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा है कि इस तरह की अराजकता और हिंसा से पश्चिमी देशों की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा को बताया अस्वीकार्य, देश में हिंसक झड़पों के बाद वीकेंड में 2,300 से अधिक गिरफ्तारियां
फ्रांस में बढ़ती महंगाई, स्कूलों की खराब हालत और आर्थिक नीतियों के विरोध में चल रहा यह आंदोलन अब हिंसक रूप ले चुका है। राजधानी पेरिस समेत देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई खूनी झड़पों के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश के नाम संबोधन में दो टूक कहा है कि किसी भी स्थिति में हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस और सुरक्षा बलों ने सप्ताहांत के दौरान तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल 2,300 से अधिक उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है, जबकि देश में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

