
मंदसौर/नाहरगढ़। किसी नगर की पहचान केवल उसकी इमारतों और सड़कों से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध संस्कृति, धार्मिक आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं से होती है। मंदसौर जिले के नाहरगढ़ में दशहरे के दूसरे दिन एकादशी (ग्यारस) पर निकलने वाला झांकियों का भव्य चल समारोह इसी गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। इस आयोजन की खासियत केवल इसकी भव्यता नहीं, बल्कि इसके पीछे वर्षों से समर्पित भाव के साथ जुटे वे लोग भी हैं, जिन्होंने परंपरा की लौ को बुझने नहीं दिया। इनमें समाजसेवी ओमगिरी गोस्वामी का नाम प्रमुखता से सामने आता है। पिछले 15 वर्षों से झांकियों और अखाड़ों को प्रोत्साहित कर धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा को संबल दे रहे गोस्वामी 16वें वर्ष भी अपनी पहल को निरंतर आगे बढ़ाएंगे।
-जब सिमटने लगी थी नगर की गौरवशाली परंपरा
नाहरगढ़ में ग्यारस पर झांकियां निकालने की परंपरा वर्षों पुरानी है। दशहरे के दूसरे दिन निकलने वाले इस चल समारोह में धार्मिक आस्था, भक्ति, शौर्य और सांस्कृतिक उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिलता रहा है। झांकियों के माध्यम से धार्मिक प्रसंगों का जीवंत चित्रण होता है, वहीं अखाड़ों के प्रदर्शन लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। हालांकि, समय के साथ प्रोत्साहन की कमी और बदलते दौर के बीच यह परंपरा प्रभावित होने लगी थी। झांकियों की संख्या घटने लगी और नगर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा यह आयोजन अपनी पुरानी भव्यता खोने लगा। ऐसे समय में इसे फिर से मजबूती देने की आवश्यकता महसूस हुई।
-ओमगिरी गोस्वामी ने संभाली परंपरा को सहेजने की जिम्मेदारी
इसी दौर में समाजसेवी ओमगिरी गोस्वामी ने आगे आकर इस धार्मिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने का संकल्प लिया। उन्होंने झांकियों और अखाड़ों को प्रोत्साहित करने की पहल शुरू की, जिससे आयोजन में भाग लेने वालों का उत्साह बना रहे और नई पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे। उनकी यह पहल केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं, बल्कि नगर की वर्षों पुरानी विरासत को सहेजने की निरंतर कोशिश बन गई। 15 वर्षों से जारी इस प्रयास ने चल समारोह के प्रति सहभागिता और उत्साह को प्रोत्साहित करने में अपनी भूमिका निभाई है।
-खेल हो या सांस्कृतिक आयोजन, गोस्वामी परिवार का नाम रहता है अग्रणी
नाहरगढ़ में जब भी खेलकूद, धार्मिक उत्सव अथवा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की चर्चा होती है, तो गोस्वामी परिवार का नाम भी लोगों की जुबान पर आता है। सामाजिक और धार्मिक आयोजनों से जुड़ाव, परंपराओं के प्रति सम्मान तथा आयोजन में सहभागी बनने वालों का उत्साह बढ़ाने की भावना इस परिवार की पहचान के रूप में सामने आती है। समाजसेवी ओमगिरी गोस्वामी की पहल इसी सोच को आगे बढ़ाती है। झांकियों और अखाड़ों को प्रोत्साहन देकर वे उन युवाओं और प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाते हैं, जो अपनी कला, अभ्यास और श्रद्धा के माध्यम से नगर की सांस्कृतिक छवि को जीवंत रखते हैं। ऐसी पहलें समाज में सहभागिता की भावना मजबूत करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा भी देती हैं।
-16वें वर्ष भी प्रत्येक झांकी और अखाड़े को मिलेगा प्रोत्साहन
इस वर्ष भी दशहरे के दूसरे दिन ग्यारस पर नाहरगढ़ में भव्य चल समारोह निकाला जाएगा। लगातार 16वें वर्ष समाजसेवी ओमगिरी गोस्वामी प्रत्येक झांकी और अखाड़े को प्रोत्साहित कर आयोजन में सहभागी बनने वालों का उत्साहवर्धन करेंगे। इस पहल का उद्देश्य आयोजन की गरिमा बढ़ाने के साथ वर्षों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। झांकियों के माध्यम से जहां धर्म और संस्कृति के विविध स्वरूप सामने आएंगे, वहीं अखाड़ों के प्रदर्शन में शौर्य, अनुशासन और अभ्यास की झलक देखने को मिलेगी।
-आस्था, संस्कृति और सामाजिक समर्पण का संगम
नाहरगढ़ मे ग्यारस चल समारोह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नगर की सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। ओमगिरी गोस्वामी द्वारा 15 वर्षों से जारी प्रोत्साहन की पहल अब 16वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। यह प्रयास संदेश देता है कि परंपराएं केवल विरासत में मिलने से जीवित नहीं रहतीं, बल्कि उन्हें संजोने और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर समर्पण की आवश्यकता होती है। दशहरे के दूसरे दिन निकलने वाला यह चल समारोह एक बार फिर नाहरगढ़ की आस्था, भक्ति, शौर्य और सांस्कृतिक गौरव की झलक प्रस्तुत करेगा। आयोजन को लेकर नगरवासियों में उत्साह का माहौल है और सभी की निगाहें ग्यारस के इस पारंपरिक समारोह पर टिकी हैं।
