सिंगरौली। सरई रेलवे स्टेशन के कोल यार्ड में कोयले के परिवहन और भंडारण को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। कांग्रेस नेता अरुण जायसवाल ने रेलवे प्रशासन और संबंधित कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कांग्रेस नेता के मुताबिक, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश में कोल यार्ड के लिए सालाना 4.80 लाख मीट्रिक टन कोयले की लोडिंग और परिवहन की अनुमति है, जबकि यहां प्रतिवर्ष 25 से 30 लाख मीट्रिक टन कोयले का परिवहन होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
इसके अलावा, रेलवे स्टेशन के यात्री प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर कोयला जमा करने और भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कोयले से उड़ने वाली धूल के कारण स्थानीय नागरिकों, राहगीरों और स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
वहीं, कांग्रेस नेता ने चालू वित्तीय वर्ष में कोल यार्ड से 122.59 करोड़ रुपये से अधिक का मालभाड़ा मिलने का दावा करते हुए रेलवे के वाणिज्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
उन्होंने मांग की है कि कोयला परिवहन के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं और पर्यावरणीय मानकों के पालन की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
फिलहाल, इन आरोपों पर संबंधित रेलवे प्रशासन और कंपनियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
