
जबलपुर । हाईकोर्ट ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल को निर्देश दिए हैं कि जब याचिकाकर्ता के बाद नियुक्त समान पद के कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका है, तो आवेदक को भी नियमितीकरण का लाभ दिया जाए। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने विश्वविद्यालय को 45 दिन के भीतर याचिकाकर्ता के पक्ष में नियमितीकरण का आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं।
भोपाल निवासी शैलेष तांबेकर की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा ने पक्ष रखते हुए बताया कि उनके मुवक्किल की नियुक्ति दो जून 1997 को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में हुई थी। वह पिछले करीब 20 वर्षों से नियमितीकरण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि उनके बाद नियुक्त दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को विश्वविद्यालय प्रशासन नियमित कर चुका है, लेकिन उन्हें अब तक इस लाभ से वंचित रखा गया है। याचिकाकर्ता ने विश्वविद्यालय में कथित घोटाले और भ्रष्टाचार की जांच की मांग भी की थी। विश्वविद्यालय की ओर से कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता का मामला स्क्रूटनी समिति के समक्ष लंबित है। समिति द्वारा पात्र पाए जाने पर उनके नियमितीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता के बाद नियुक्त समान पद पर कार्यरत कई कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका है। ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने विश्वविद्यालय को 45 दिन के भीतर नियमितीकरण का आदेश जारी करने का निर्देश देकर मामले में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
