
जीरन। हिंदू धर्म में मां कंकाली को शक्ति स्वरूपा देवी के रूप में पूजा जाता है। भक्तों की मान्यता है कि मां कंकाली अपने भक्तों के कष्ट दूर करती हैं, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। जीरन नगर के नया बस स्टैंड स्थित अहिरवार मोहल्ले में विराजित मां कंकाली का मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
हर शुभ कार्य से पहले माता के दर्शन की परंपरा
जीरन के कंकाली माता मंदिर से नगरवासियों की आस्था लंबे समय से जुड़ी हुई है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले माता के दर्शन करना शुभ माना जाता है। शादी-विवाह हो, नई बहू का गृह प्रवेश हो या फिर नया वाहन खरीदना हो, श्रद्धालु मां कंकाली के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि माता के आशीर्वाद से शुभ कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं।
नवरात्र में नौ दिनों तक होती है विशेष आराधना
शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। नौ दिनों तक कलश स्थापना कर विधि-विधान से मां कंकाली की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान श्रद्धालु माता के दर्शन कर परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्र के दिनों में मंदिर में भक्तिभाव और धार्मिक उत्साह का विशेष वातावरण रहता है।
नगर की रक्षक के रूप में पूजी जाती हैं मां कंकाली
मंदिर के पुजारी के अनुसार, मां कंकाली को पूरे नगर की रक्षक के रूप में माना जाता है। श्रद्धालु अपनी समस्याओं और परेशानियों को लेकर माता के दरबार में प्रार्थना करते हैं तथा सुखमय जीवन के लिए आशीर्वाद मांगते हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि मां कंकाली के प्रति उनकी गहरी आस्था है और वे नियमित रूप से मंदिर पहुंचकर दर्शन करते हैं।
जीरन के नया बस स्टैंड स्थित मां कंकाली मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान ही नहीं, बल्कि नगरवासियों की धार्मिक भावनाओं और परंपराओं से जुड़ा आस्था का प्रमुख केंद्र भी है। पीढिय़ों से चली आ रही श्रद्धा और विश्वास के चलते माता का दरबार भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।
