जबलपुर: जिला व सत्र न्यायाधीश पद से किया गया नियम विरूध्द तरीके से अनिर्वाय सेवानिवृत्त किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि निर्धारित नियम के विपरीत उसे मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की फुल बेंच की सिफारिश से अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान की गयी है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय की मदद के लिए न्याय मित्र की नियुक्ति की गयी है।
याचिकाकर्ता आर.के. श्रीवास की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि उन्होंने वर्ष 2000 में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था। उन्हें एआईआर में प्रतिवर्ष बी व सी ग्रेड मिले थे। जिसके कारण उन्हें साल वर्ष 2016 में उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नत कर जिला न्यायाधीश (प्रारंभिक स्तर) बनाया गया था। उच्च न्यायिक सेवा में डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान उनका चार बार स्थानांतरण किया गया। इसके अलावा विभागीय जांच प्रारंभ कर उन्हें निलंबित कर दिया गया। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की फुल बेंच की सिफारिश पर अप्रैल 2018 में उन्हें अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया गया।
याचिका में कहा गया था कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा (भर्ती और सेवा की शर्तें) नियम, 2017 के नियम 14, उप-नियम 2 के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति लागू करने के लिए, संबंधित अधिकारी की सेवा के 10 वर्ष पूर्ण या उसकी आयु 50 वर्ष होनी चाहिए थी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा में सिविल जज और मजिस्ट्रेट के रूप में उनके पिछले कार्यकाल को नहीं गिना जा सकता है। यह पद निचली न्यायपालिका (लोअर ज्यूडिशियरी) के अंतर्गत आते है।
याचिका में कहा गया था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने से ठीक एक महीने पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1994 के सेवा नियमों में बदलाव किया था,जो जो मार्च 2018 से प्रभावी हुए। इन नए नियमों के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए आवश्यक सेवा अवधि को 20 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष कर दी गयी परंतु आयु सीमा 50 साल को यथावत रखा गया था।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सके। निचली और उच्च न्यायपालिका में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान, उन्हें अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में बी या सी ग्रेड मिला, जिसका अर्थ है अच्छा या बहुत अच्छा होता है। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत श्रीवास्तव को न्यायमित्र नियुक्त करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 16 नवम्बर को निर्धारित की है।
