बैंकिंग क्षेत्र पर अखिलेश के 12 सवालों का बिंदुवार जवाब दिया वित्त मंत्रालय ने

श्री यादव के प्रश्नों के जवाब में विभाग ने सोशल मीडिया पर एक लंबे पोस्ट में कहा कि पिछले 12 सालों में भारत की बैंकिंग प्रणाली लगातार मजबूत हुई है। इसमें सरकार द्वारा किए गए विनियामक बदलावों और सुशासन संबंधी उपायों का बड़ा योगदान रहा है।

इन प्रयासों से बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है, बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है और सेवा प्रदान करने के तरीकों में सुधार आया है। सपा नेता द्वारा उठाए गए मुद्दों पर बिंदुवार स्पष्टीकरण देते हुए विभाग ने कहा है कि बैंक ‘बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट ‘ की सुविधा देते हैं, जिसमें न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की कोई शर्त नहीं होती। ऐसे खातों में कुछ बुनियादी बैंकिंग सुविधाएं, जैसे कि पैसे जमा करना, निकालना, एटीएम कार्ड आदि बिना किसी शुल्क के दी जाती हैं।

अगस्त 2014 में शुरू की गई ‘जन धन योजना’ के तहत 59 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं। इनमें न्यूनतम बैलेंस रखने की कोई बाध्यता नहीं है और न ही बैलेंस न होने पर कोई जुर्माना लगता है-यह वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। जन धन योजना विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाने, क्रेडिट सुविधाएं देने, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने और बचत व निवेश को बढ़ावा देने का एक प्रमुख माध्यम रही है।

जन-जन तक बैंकिंग सुविधा सुनिश्चित करने के लिए पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सेवा केंद्र बनाए गए हैं, जिससे देश के सभी गाँवों को बैंकिंग आउटलेट से जोड़ा जा चुका है।

सरकार ने बड़े धोखाधड़ी करने वालों और ऋण न चुकाने वालों से निपटने के लिए कड़े कानून बनाए हैं। पिछले तीन दशकों में ब्याज दरें महंगाई और बाजार से तय होती रही हैं। 2010-2014 में महंगाई इतनी अधिक थी कि जमाकर्ताओं को नाममात्र ऊँचा ब्याज मिलने के बावजूद वास्तविक नुकसान हुआ। 2013 में वरिष्ठ नागरिक जमा योजना पर 9.2 प्रतिशत ब्याज था, जबकि महंगाई 9.5 प्रतिशत यानी नकारात्मक वास्तविक ब्याज। वर्तमान सरकार ने महँगाई पर मज़बूती से नियन्त्रण किया है। 2026 में स्थिति अलग है। आज की स्थिति में इस योजना में ब्याज 8.2 प्रतिशत और महंगाई लगभग पांच प्रतिशत है, जिससे जमाकर्ताओं को वास्तविक लाभ (प्लस 3.2 प्रतिशत) मिल रहा है।

ऋण दरें भी 2013 के लगभग 10 प्रतिशत से अधिक से घटकर लगभग 7.5 प्रतिशत से भी कम हो गई हैं। इससे ईएमआई लगभग 15 प्रतिशत तक कम हुई और लोगों पर वित्तीय बोझ घटा है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल लाइफ प्रमाण पत्र , घर में बैंकिंग जैसी सुविधाएँ शुरू हुई हैं।

विभाग ने कहा है नोटबंदी एक आर्थिक निर्णय था, जो काले धन, जाली मुद्रा तथा अवैध सीमा-पार वित्तपोषण पर अंकुश लगाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था।

विभाग में अपने उत्तर में यह भी कहा है कि ⁠सरकार ने बैंक लॉकरों की सुरक्षा के लिए सख्त व्यवस्था लागू की है।

रिजर्व बैंक मास्टर दिशा निर्देश के अनुसार मौजूदा ग्राहकों के लिए संशोधित लॉकर समझौते निष्पादित करने में लगने वाले स्टाम्प पेपर का खर्च बैंकों द्वारा वहन किया जाता है। बैंकों के लॉकर में सामाग्री का नुकसान होना एक अपवाद है।

केवाईसी के बारे में विभाग ने कहा है कि पैसे की धोखाधड़ी और आतंकवाद फंडिंग को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ने इस बारे में दिशा-निर्देश बनाए हैं। केवल 8-10 साल में केवल एक बार केवाईसी अपडेट करना होता है।

सपा नेता के प्रश्न के जवाब में कहा गया है ⁠सरकार बेहतर गवर्नेंस, ग्राहकों को अच्छी सेवा देने, तकनीकी आधुनिकीकरण और कामकाज की कार्यक्षमता में सुधार के जरिए बैंकों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक , फंसे हुए कर्ज के बढ़ते स्तर के कारण भारी दबाव में थे। सरकार ने अथक प्रयासों से इस समस्या से निपटने के लिए व्यापक कदम उठाए। इन पहलों की बदौलत, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.98 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक मुनाफा दर्ज किया। साथ ही, 31 मार्च 2026 तक उनका सकल एनपीए अनुपात 1.93 स्तर के स्तर पर आ गया, जो कई दशकों में सबसे निचला स्तर है।

विभाग ने कहा है कि ग्राहक राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 के जरिए या बैंकों के अपने माध्यमों (जैसे कॉल सेंटर और शाखाओं) से डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी की रिपोर्ट कर सकते हैं। सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने और धोखाधड़ी को रोकने के लिए, रिजर्व बैंक में और बैंक विज्ञापनों, एसएमएस, व्हाट्सएप, ईमेल और अन्य माध्यमों से ग्राहकों को जागरूक करने का काम करते हैं। डिजिटल इंडिया के सिस्टम वैश्विक पहचान बना रहे हैं । यूपीआई ने तेज और सुरक्षित पेमेंट व्यवस्था तैयार की है। इसके अलावा, आरबीआई के निर्देशों में अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन से बचाव के उपाय बताए गए हैं, जिनमें ग्राहकों की जिम्मेदारी और मुआवजे से जुड़े नियम शामिल हैं।

विभाग ने कहा है कि क्रेडिट सुविधाएं देने के संबंध में दिशा-निर्देश संबंधित बैंकों की बोर्ड-अनुमोदित नीतियों के अनुसार होते हैं, जिनमें कोई भेदभाव नहीं किया जाता। सरकार ने किसानों, छोटे व्यवसायों, रेहड़ी-पटरी वालों, कारीगरों और उद्यमियों के लिए बिना किसी गिरवी के ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई योजनाएं शुरू की हैं।

विभाग ने कहा है कि बैंकों द्वारा बांटी जा रही बीमा पॉलिसियां पूरी तरह से ग्राहकों की सहमति से ही दी जाती हैं।

बयान में कहा गया है कि ⁠सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों को अच्छा वेतन मिलता है और समाज में उनका सम्मान है। कर्मचारियों की भर्ती, पदोन्नति और स्थानांतरण में पारदर्शिता लाने के लिए व्यवस्थाओं को और मजबूत किया गया है। ⁠

विभाग ने कहा है कि बैंक ज़ीरो-बैलेंस बचत खाते (जैसे कि ‘बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट्स’ और ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ के तहत खोले गए खाते) उपलब्ध कराते हैं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंकिंग सुविधाओं तक सबकी पहुँच हो-खासकर उन लोगों की, जिनकी अब तक बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच नहीं थी, जो कमज़ोर वर्ग से आते हैं या जो छोटी बचत करने वाले हैं। साथ ही, इसका मकसद किफायती और आसानी से उपलब्ध बैंकिंग सेवाओं के ज़रिए वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है। जन धन खातों पर कोई जुर्माना नहीं लगता। वित्तीय साक्षरता, वित्तीय समावेशन, सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग और ग्राहकों की सुविधा को बढ़ावा देने के लिए, बैंक नियमित रूप से ग्राहकों को जागरूक करने के अभियान चलाते हैं।

बयान में कहा गया है कि ये 12 स्पष्टीकरण एक ऐसी बैंकिंग प्रणाली को दर्शाते हैं जो अधिक मजबूत है, जिसकी पहुंच आसान है और जो जनता की जरूरतों के प्रति लगातार अधिक संवेदनशील होती जा रही है।

 

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