बनखेड़ी: सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई बनखेड़ी क्षेत्र के ग्राम खापाखुर्द निवासी विलासा तामसी शर्मा की जिंदगी तो नहीं बचाई जा सकी, लेकिन उनके परिजनों ने अंगदान का निर्णय लेकर दूसरों को नया जीवन देने की सराहनीय पहल की है। महिला के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिजनों की सहमति से भोपाल एम्स में उनके अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। इस दुखद घड़ी में परिजनों द्वारा लिया गया यह निर्णय मानवता, संवेदनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
देवी दर्शन के लिए जाते समय हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम खापाखुर्द निवासी विलासा तामसी शर्मा कुछ दिन पहले मोटरसाइकिल से सलकनपुर स्थित देवी मंदिर में दर्शन करने जा रही थीं। इसी दौरान बुधनी के पास सलकनपुर रोड पर उनका सड़क हादसा हो गया। हादसे में उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। दुर्घटना के बाद उन्हें उपचार के लिए भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार किया। हालांकि, गंभीर चोटों के चलते उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका और चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
दुख की घड़ी में लिया अंगदान का निर्णय
परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था। एक ओर जीवनसाथी और परिवार के सदस्य को खोने का गहरा दुख था, वहीं दूसरी ओर किसी अन्य जरूरतमंद व्यक्ति को जीवन देने का अवसर भी सामने था। चिकित्सकों की सलाह के बाद परिजनों ने विलासा तामसी शर्मा के अंगदान का निर्णय लिया। परिवार की इस सहमति से उनके अंगों को जरूरतमंद मरीजों के उपचार के लिए दान करने की प्रक्रिया पूरी की गई। विलासा के पति अखिलेश शर्मा ने बताया कि उनकी पत्नी की उम्र लगभग 30 वर्ष थी। परिवार की इच्छा है कि उनके अंगों से दूसरे लोगों को जिंदगी मिल सके और किसी जरूरतमंद परिवार को अपने प्रियजन को बचाने का अवसर प्राप्त हो। पत्नी को खोने का दुख असहनीय है, लेकिन उनके अंगों से यदि किसी दूसरे व्यक्ति को नया जीवन मिल सके, तो यह उनके लिए संतोष की बात होगी।
दोनों किडनी और लीवर सहित अंगदान
जानकारी के अनुसार, भोपाल एम्स के चिकित्सकों ने विलासा तामसी शर्मा की दोनों किडनी और लीवर निकालकर अंगदान की प्रक्रिया पूरी की। परिजनों के अनुसार, अन्य आवश्यक अंगों के दान की प्रक्रिया भी की गई। अंगदान के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किन मरीजों को अंग प्रत्यारोपित किए जाएंगे, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। अंगदान को चिकित्सा जगत में जीवन बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके परिजनों की सहमति से किए गए अंगदान से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। ऐसे में विलासा के परिजनों का निर्णय समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
गृह ग्राम में होगा अंतिम संस्कार
विलासा तामसी शर्मा के निधन की खबर से उनके परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है। उनका अंतिम संस्कार आज उनके गृह ग्राम खापाखुर्द में किया जाएगा। एक सड़क हादसे ने परिवार से उसकी प्रिय सदस्य को छीन लिया, लेकिन परिजनों के अंगदान के फैसले ने इस दुखद घटना के बीच सेवा और मानवता का संदेश दिया है।विलासा तामसी शर्मा अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों से यदि अन्य लोगों को जीवनदान मिलता है, तो उनकी स्मृति हमेशा उन परिवारों के जीवन में जीवित रहेगी, जिन्हें इस पहल से नई उम्मीद मिलेगी। परिजनों का यह निर्णय समाज को यह संदेश देता है कि असहनीय दुख की घड़ी में भी मानवता और दूसरों के जीवन के प्रति संवेदना का रास्ता चुना जा सकता है।
