नयी दिल्ली 16 अक्टूबर (वार्ता) केंद्रीय खेल मंत्रालय ने शुक्रवार को राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) को वित्तीय सहायता देने की संशोधित योजना के लिए संचालन संबंधी दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार ने इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 (16वें वित्त आयोग चक्र) की अवधि तक जारी रखने की मंजूरी दी है, जिसके लिए कुल 7,386.74 करोड़ रूपये का परिव्यय तय किया गया है। यह योजना ओलंपिक गेम्स, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, पैरालंपिक गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में भारत के एथलीटों की मदद करने का मुख्य तरीका है। इस योजना नेशनल कोचिंग कैंप लगाने, एकेडमी में ट्रेनिंग और एथलीट सपोर्ट के लिए सपोर्ट देती है, जिसमें बोर्डिंग, लॉजिंग, स्पोर्ट्स किट, इंश्योरेंस और स्पोर्ट्स साइंस सर्विस, विदेशी कोच, हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स साइंटिस्ट और डॉक्टर जैसे सपोर्ट स्टाफ को शामिल करना, इंटरनेशनल ट्रेनिंग और कॉम्पिटिशन के ज़रिए विदेश में अनुभव, सीनियर, जूनियर और सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप का आयोजन, ग्रासरूट और जूनियर एथलीट डेवलपमेंट और NSF को एडमिनिस्ट्रेटिव और गवर्नेंस सपोर्ट शामिल है।
संशोधित योजना में, कई नए स्ट्रेटेजिक कॉम्पोनेंट शामिल किए गए हैं, जो भारत के लॉन्ग-टर्म स्पोर्टिंग विज़न और 2036 ओलंपिक बिड और कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयारियों के साथ अलाइन हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओ की मेजबानी करने के लिए मदद की रकम में बढ़ोतरी। संशोधित योजना के तहत भारत में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी करने के लिए फाइनेंशियल मदद में काफी बढ़ोतरी की गई है। अब हिस्सा लेने वाले देशों और एथलीट की संख्या के आधार पर, एनएसएफ को किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की मेजबानी करने के लिए 50 करोड़ रुपये तक की फाइनेंशियल मदद दी जा सकती है। एनएसएफ के प्रपोज़ल का असेसमेंट सेक्रेटरी (स्पोर्ट्स) की हेड वाली एक तय कमिटी करेगी।
ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेनिंग: अभी, ओलंपिक समेत बड़े अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स इवेंट्स की तैयारी कर रहे एथलीटों की कोचिंग/ट्रेनिंग नेशनल सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस (एनसीओई), एकेडमी और प्राइवेट स्पोर्ट्स फैसिलिटीज़ के साथ-साथ विदेशी ट्रेनिंग फैसिलिटीज़ में भी होती है। हाई स्टैंडर्ड की स्पेशल ट्रेनिंग देने के लिए, लेटेस्ट स्पोर्ट्स साइंस इक्विपमेंट से लैस ओलंपिक ट्रेनिंग सेंटर्स (ओटीसी) बनाने की योजना है, और ये सेंटर्स एक ही खेल के लिए होंगे, जिनमें सबसे अच्छी मॉडर्न ट्रेनिंग फैसिलिटीज़ और एक्सपर्ट्स होंगे, जिससे भारतीय एथलीटों की विदेशी ट्रेनिंग पर डिपेंडेंस कम होगी। ऐसे ओटीसी में ट्रेनिंग ले रहे भारतीय एलीट एथलीटों को कोच और टेक्निकल स्टाफ, स्पोर्ट्स साइंस सर्विसेज़, और स्पेशल इक्विपमेंट और टेक्निकल सपोर्ट से सपोर्ट किया जाएगा।
नेशनल गेम्स के लिए सपोर्ट: नेशनल गेम्स की इंपॉर्टेंस और उन्हें सही तरीके और स्केल पर ऑर्गनाइज़ करने की ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए, रिवाइज़्ड स्कीम में 10 लाख रुपये तक की मदद देने का प्रोविज़न किया गया है। नेशनल गेम्स के आयोजन के लिए स्पोर्ट्स इक्विपमेंट, टाइमिंग, स्कोरिंग और रिजल्ट सर्विस, टेक्निकल अधिकारियों को मेहनताना और टेक्निकल काम के लिए 50 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। देसी खेलों की ग्लोबल पहुंच को फैलाने के लिए, देसी खेलों के एनएसएफ को मदद का एक हिस्सा रिवाइज्ड स्कीम में शामिल किया गया है।ग्लोबल साउथ के लिए ट्रेनिंग पार्टनर: भारत को ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के लिए एक प्रमुख स्पोर्ट्स ट्रेनिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत विदेशी एथलीटों और कोचों को भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के केंद्रों में प्रशिक्षण की सुविधाएं और छात्रवृत्ति दी जाएगी। बहुपक्षीय सहयोग के तहत ब्रिक्स और बिम्सटेक जैसे बहुपक्षीय मंचों के तहत खेल प्रतियोगिताओं, सम्मेलनों और अनुसंधान कार्यशालाओं के आयोजन के लिए भी वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।

